योगी मंत्रिमंडल विस्तार; मिशन 2027 के लिए दलितों को साथ लेकर पिछड़ों के पीछे चली भाजपा
योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने 2027 के चुनावों के लिए जातिगत समीकरणों को साधा है। कुल 6 नए मंत्रियों में 3 ओबीसी, 2 दलित और 1 ब्राह्मण को शामिल किया गया है।

yogi cabinet expansion: योगी मंत्रिमंडल के विस्तार के जरिए भाजपा ने 2027 की चुनावी पटकथा लिख दी है। जातियों के जरिए सत्ता समीकरण साधने की कोशिश है। पीडीए की काट में भाजपा ने ओबीसी को रिझाने को बड़ा दांव चला है। मंत्री बनाए गए छह नये चेहरों में तीन ओबीसी, दो दलित और एक ब्राह्मण शामिल है जबकि पिछड़े वर्ग से आने वाले दो चेहरों का कद बढ़ाया गया है। खास बात यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार में अपने दुर्ग मजबूत करने के साथ ही विरोधी किलों में सेंधमारी की जुगत लगाई गई है। यही कारण है कि रायबरेली व कन्नौज का वजन बढ़ाया गया है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र को और तरजीह दी गई है।
यूपी में भाजपा ने साफ कर दिया है कि वो दलितों को साथ लेकर पिछड़ों के पीछे चलेगी। पार्टी अगड़ों को साथ रखने की कवायद के साथ आधी आबादी को भी साधेगी। पार्टी का विजयरथ 2017, 2019, 2022 में अजेय रहा। झटका 2024 में लगा, जब पार्टी 33 सीटों पर सिमट गई। इस घटनाक्रम से भाजपा ने सबक लिया और यूपी में दलितों को जोड़ने की मुहिम शुरू की। कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर उस पासी वोट को रिझाने का प्रयास है, जो 2024 में पार्टी से छिटका था। वहीं अनूप प्रधान वाल्मीकि के बाद सरकार में खत्म हुए वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधित्व को सुरेंद्र दिलेर के जरिए बहाल किया गया है। दरअसल दलित वर्ग में शामिल वाल्मीकि समाज लगातार मजबूती से भाजपा के साथ रहा है।
ओबीसी को 50 फीसदी मंत्री पद और दो प्रमोशन
विपक्ष का पूरा फोकस इन दिनों जिस पिछड़े वर्ग पर है, भाजपा ने सरकार और संगठन के मोर्चे पर उसे साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा ने ओबीसी वर्ग की सियासत की राह पर आगे बढ़ने का स्पष्ट संदेश दे दिया है। साथ ही दलितों को रिझाने और अगड़ों को साधने की भी योजना है। विस्तार में ओबीसी वर्ग को वरीयता देते हुए जहां आज मंत्री बनाए गए छह विधायकों में तीन ओबीसी के हैं तो वहीं प्रोन्नत हुए दो मंत्री भी ओबीसी वर्ग से यानी 50 फीसदी पद सिर्फ पिछड़े वर्ग को दिए गए हैं। वहीं सोमेंद्र तोमर व अजीत सिंह पाल के रूप में ओबीसी वर्ग के दो मंत्रियों का कद भी बढ़ाया गया है।
संगठन को सम्मान, आगंतुकों का स्वागत
भाजपा नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार में जहां संगठन को तरजीह दी है, वहीं दूसरे दलों से आने वालों को भी निराश नहीं किया है। पिछड़े मंत्रियों की बात करें तो जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी पार्टी संगठन का पुराना चेहरा हैं। संगठन से जुड़ा दूसरा नाम हंसराज विश्वकर्मा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से आते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष रहने के साथ ही एमएलसी भी हैं। राज्यमंत्री से स्वतंत्र प्रभार का प्रमोशन पाने वाले सोमेंद्र तोमर भी संगठन से हैं। वे विद्यार्थी परिषद और भाजयुमो में विभिन्न दायित्वों पर रहे हैं। पार्टी ने दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को भी संदेश देने की कोशिश की है। सपा से आए मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर यही संदेश दिया गया है। बसपा व सपा में रह चुके कैलाश राजपूत को भी मंत्री पद से नवाजा गया है।
पश्चिम में जाट-गुर्जर समीकरण साधने का प्रयास
एक ओर भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बना क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। पार्टी की नजर वेस्ट यूपी के जाट-गुर्जर समीकरण पर भी है। दरअसल, बीते कुछ समय से सपा मुखिया अखिलेश यादव भी महाराजा मिहिर भोज की मूर्ति के बहाने गुर्जरों को साधने के प्रयास में जुटे हैं। बीते दिनों अखिलेश ने गाजियाबाद में गुर्जरों की सभा भी की थी। ऐसे में पार्टी ने मंत्रिमंडल के एकमात्र गुर्जर चेहरे सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाकर गुर्जरों को संदेश देने का प्रयास किया है। वहीं भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाकर पश्चिम के समीकरण को दुरुस्त करने की जुगत लगाई गई है।
रायबरेली-कन्नौज का वजन बढ़ा
योगी सरकार में रायबरेली और कन्नौज का वजन बढ़ाया गया है। इसके पीछे मंशा कांग्रेस और सपा के किलों में सेंधमारी की है। रायबरेली में पहले कांग्रेस से आए दिनेश प्रताप सिंह स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री थे। अब सपा से आए ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा कांग्रेस के अभेद्य किले को भेदने की राह पर आगे बढ़ी है। कन्नौज से सपा मुखिया अखिलेश यादव सांसद हैं। उनकी पत्नी डिंपल भी सांसद रह चुकी हैं। अभी कन्नौज से असीम अरुण योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री हैं। अब तिर्वा से विधायक कैलाश राजपूत के जरिए लोध वोटरों को रिझाने के साथ ही सपा के दुर्ग में सेंधमारी का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को सर्वाधिक तरजीह दी गई है। वहां से अनिल राजभर, रवींद्र जायसवाल और डा. दयाशंकर मिश्र दयालु (एमएलसी) पहले ही मंत्री थे। अब एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा के जरिए वाराणसी कोटे में चौथा मंत्री बनाया गया है।
पूजा पाल का नाम हटा तो बढ़ा अजीत का कद
मंत्रिमंडल विस्तार वाली सूची में दो ही नाम ऐसे थे, जो तय माने जा रहे थे। यह नाम भूपेंद्र चौधरी और पूजा पाल का था। मगर अंतिम समय पर पूजा पाल का नाम हट गया। कहा जा रहा है कि इसके लिए लखनऊ से दिल्ली तक कवायद चली। हालांकि पूजा पाल का नाम काटे जाने तक इसका शोर बहुत ज्यादा हो चुका था। ऐसे में नेतृत्व ने समीकरण साधने के लिए अजीत सिंह पाल का कद बढ़ाने का फैसला किया।
मंत्रिमंडल में क्षेत्रवार स्थिति
पूर्वांचल-18 मंत्री
पश्चिम-17 मंत्री
अवध-9 मंत्री
बुंदेलखंड-4 मंत्री
रुहेलखंड-6 मंत्री




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