कल हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किए गए थे बच्चे, आज एक और पानी की टंकी चर्चा में; आंधी में टूटकर लटकी
सोमवार को सिद्धार्थनगर में एक और पानी की टंकी चर्चा में आ गई है। मौसम के बिगड़े मिजाज के बीच यह आंधी में क्षतिग्रस्त होकर लटक गई। बताया जा रहा है कि टंकी अभी निर्माणाधीन थी। इसका उद्घाटन नहीं हुआ था। टंकी की हालत देखने के बाद लोग इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी पर शनिवार को पांच किशोर चढ़े थे। अपराह्न में उतरते समय सीढ़ी टूटने से तीन बच्चे नीचे गिर गए। इनमें से एक की मौत हो गई। अन्य दो का इलाज चल रहा है। जबकि पानी की टंकी पर फंसे दो बच्चों को 15 घंटे बाद रविवार सुबह करीब 5:30 बजे गोरखपुर से आए वायुसेना के हेलिकॉप्टर से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इस घटना के एक दिन बाद सोमवार को इसी जिले में एक और पानी की टंकी चर्चा में आ गई है। वजह यह है कि सोमवार को मौसम के बिगड़े मिजाज के बीच यह आंधी में क्षतिग्रस्त होकर लटक गई। बताया जा रहा है कि टंकी अभी निर्माणाधीन थी। इसका उद्घाटन नहीं हुआ था। टंकी की हालत देखने के बाद लोग इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थनगर के खुनियांव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में निर्माणाधीन पानी की टंकी आंधी के दौरान क्षतिग्रस्त होकर लटक गई। स्थानीय लोगों के अनुसार इससे बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। यह टंकी जल निगम की ओर से लगभग 32.41 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही थी। लोगों का कहना है कि टंकी की हालत देखकर निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह होता है। यदि यह पूरी तरह गिर जाती, तो आसपास के लोगों की जान-माल को भारी नुकसान हो सकता था। फिलहाल लटकती टंकी ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बनी हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टंकी अभी निर्माणाधीन थी और मौसम सामान्य होने पर इसे बदलवा दिया जाएगा। हालांकि, इस जवाब से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जर्जर पानी टंकियां बनीं खतरा, जांच की दरकार
शनिवार को सिद्धार्थनगर शहर के कांशीराम आवास में बनी पानी की टंकी पर शनिवार को पांच किशोर चढ़े थे। दोपहर में सीढ़ी से उतरते समय वह टूट गई इससे उतर रहे तीन किशोर नीचे गिर गए थे। एक की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दो किशोर टंकी पर ही फंसे रहे। उन्हें बचाने के लिए रविवार सुबह सेना का हेलीकाप्टर आया। लगभग पंद्रह घंटे टंकी पर बैठ कर दहशत के साए में दोनों ने समय गुजारा। अंधेरे में कहीं कोई हादसा न हो जाए प्रशासन ने फ्लड लाइट से टंकी पर रोशनी कर रखी थी। शाम पांच बजे ड्रोन से किशोरों तक रस्सी भेजी गई तब उनकी तक पानी की बोतल पहुंच सकी थी इस दौरान वह लोग प्यासे ही रहे।
टंकी पर फंसे पवन और कल्लू की हालत जहां खराब थी वहीं नीचे मौजूद उनके परिजन भी हर पल इस बात को लेकर डर रहे थे कि जिस तरफ बच्चे बैठे हैं कहीं उस ओर का भी छज्जा टूट कर न गिर जाए और कोई अनहोनी हो जाए। प्रशासनिक अमला पूरे टाइम मौजूद रहा। गोरखपुर से एसडीआरएफ टीम लिफ्ट वाहन लेकर पहुंचा लेकिन टंकी के चारों ओर पानी भरा होने से बचाव कार्य न हो सका। इस बीच अंधेरा भी पांव पसारने लगा था। अंधेरे से किशोरों व उनके परिजनों की हवाइयां उड़ने लगी क्योंकि बच्चे कहीं डर कर नीचे न गिर जाएं। प्रशासन ने आनन-फानन में फ्लड लाइट का इंतजाम किया और सीधा फोकस पानी की टंकी पर उस ओर किया जहां पर किशोर बैठे थे। लोगों को डर था कि कहीं बच्चे सो न जाएं और नींद की हालत में नीचे न गिर पड़ें। नीचे पूरी रात मौजूद प्रशासनिक अमला व भीड़ बच्चों का हौसला बढ़ाता रहा। सुबह करीब पांच बजे जब सेना का हेलीकॉप्टर आया और उसने रेस्क्यू किया तब कहीं जा कर किशोरों, उनके परिजन, प्रशासन व आमजन ने राहत की सांस ली।




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