कौन बनेगा भाजपा का क्षेत्रीय अध्यक्ष? यूपी चुनाव से पहले पूर्वांचल में अटकलें तेज; जानें गणित
भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर क्षेत्र में 62 विधानसभा सीटें आती हैं और 12 लोकसभा सीटें। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद गोरखपुर क्षेत्र से आते हैं। पिछड़ी जाति का प्रदेश अध्यक्ष देकर राष्ट्रीय नेतृत्व ने संदेश दे दिया है कि गोरखपुर क्षेत्र उसके लिए कितना अहम है।

UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सभी कील कांटे दुरुस्त करने में जुटी भाजपा के समाने अब नया क्षेत्रीय अध्यक्ष चुनने की चुनौती है। गोरखपुर क्षेत्र में देवरिया जिलाध्यक्ष और गोरखपुर महानगर अध्यक्ष की घोषणा में बाद अब सत्ताधारी दल के क्षेत्रीय अध्यक्ष के संभावित चेहरे को लेकर अटकले तेज हैं। सपा के पीडीए की काट निकालने के जुटा भाजपा का आलाकमान किस चेहरे पर दांव लगाएगा इसे लेकर सियाली गलियारे में कयासबाजी चल रही है।
गोरखपुर क्षेत्र में प्रशासनिक तौर पर 10 जिले आते हैं और संगठन के लिहाज से 12 जिले। गोरखपुर क्षेत्र में 62 विधानसभा सीटें आती हैं और 12 लोकसभा सीटें। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी गोरखपुर क्षेत्र से आते हैं। पिछड़ी जाति का प्रदेश अध्यक्ष देकर राष्ट्रीय नेतृत्व में संदेश दे दिया है कि गोरखपुर क्षेत्र उसके लिए कितना अहम है। आजमगढ़, गाजीपुर से लेकर मऊ में लोकसभा चुनाव में सपा के प्रदर्शन को देखते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष के चेहरे को लेकर शीर्ष नेतृत्व में मंथन चल रहा है। 2022 के चुनाव में भाजपा को 62 में से 37 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थीं। अब 2028 में पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम को बेहतर बनाने की कवायद भाजपा की तरफ से हो रही है।
महानगर अध्यक्ष के अहम पद पर पिछड़े वर्ग और वैश्य बिरादरी के रमेश प्रताप गुप्ता पर दांव लगाने के साथ ही साफ हो गया है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सपा के पीडीए के काट का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है। अब क्षेत्रीय अध्यक्ष किस विरादरी का होगा इसे लेकर अटकले तेज हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोरखपुर मंडल से आते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगला क्षेत्रीय अध्यक्ष किस जिले का होगा। माना जा रहा है कि आजमगढ़ से लेकर बलिया तक सपा के विधानसभा और लोकसभा में प्रदर्शन को देखते हुए भाजपा ऐसे चेहरे को क्षेत्रीय अध्यक्ष बना सकती है, जो क्षेत्रीय संतुलन को साधने में समर्थ हो। पार्टी में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। लोग अलग-अलग नामों पर संभावना जताते हुए अलग-अलग वजहें बता रहे हैं।
जातिगत समीकरण साधने की चुनौती
वर्तमान क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय सवर्ण जाति से आते हैं। वह आजमगढ़ जिले से आते हैं, लेकिन नए क्षेत्रीय अध्यक्ष किस बिरादरी के होंगे इसे लेकर भी अटकलें हैं। सपा के पीडीए की काट के लिए दलित, पिछड़ी जाति के क्षेत्रीय अध्यक्ष को लेकर कयास लग रहा है। हालांकि, इस बात की भी प्रबल संभावना है कि भाजपा अपने परम्परागत सवर्ण वोट को सहजने से पीछे नहीं हटेगी।




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