यूपी: प्राइमरी स्कूलों में ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, पेंशन के क्या हैं नियम? शिक्षामित्र पर हाईकोर्ट का अहम आदेश
एडवोकेट सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद शिक्षामित्रों को न तो ग्रेच्युटी और न ही पेंशन दिया जा रहा है जबकि ऐसे शिक्षामित्र 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी और परिवार को कोई मदद नहीं दी जाती।

उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्रों का मानदेय हाल में 10 हजार रुपए महीने से बढ़ाकर 18 हजार रुपए महीने किया गया है। लेकिन उनकी ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और पेंशन के क्या नियम हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र को ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि, पारिवारिक पेंशन का लाभ देने की मांग में दाखिल याचिका पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी को छह सप्ताह में नियमानुसार याची को सुनकर सकारण आदेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची से तीन सप्ताह में नए सिरे से प्रत्यावेदन देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने शहनाज बेगम की याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी को सुनने के बाद याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।
एडवोकेट सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी का कहना था कि उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख 70 हजार शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं, जिन्हें मात्र 10 हजार रुपये प्रत्येक माह दिया जाता था, जो वर्तमान में 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें न तो ग्रेच्युटी और न ही पेंशन दिया जा रहा है जबकि ऐसे शिक्षामित्र 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी और परिवार को कोई सहायता नहीं दी जाती जबकि ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट और कर्मचारी भविष्य निधि कानून शैक्षणिक संस्थाओं में लागू है।
साथ ही संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक वेतन भोगी, संविदाकर्मी और अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। वाराणसी में कार्यरत शिक्षामित्र की 48 वर्ष में मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी भुगतान के लिए अनुरोध किया लेकिन बीएसए कोई निर्णय नहीं लिया। इसके बाद यह याचिका की गई।
अप्रैल से बढ़ गया है मानदेय, कैशलेस इलाज की सुविधा भी
बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो अप्रैल से लागू है। इसके साथ ही शिक्षामित्रों को 5 लाख रुपए तक के स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया गया है। योगी सरकार ने कहा है कि सभी शिक्षामित्रों को 5 लाख रुपये का सालाना कैशलेस स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाएगा। बेसिक शिक्षा परिषद को तत्काल सभी जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही समारोह आयोजित कर सभी को यह कार्ड दिया जाएगा।
म्यूचुअल ट्रांसफर की सुविधा भी मिलेगी
सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद को तत्काल सभी शिक्षामित्रों के बैंक खाते खुलवाने का भी निर्देश दिया गया है। इससे मानदेय सीधा खाते में आएगा। सरकार ने शिक्षामित्रों को उनके जिले, नजदीकी विद्यालय में तैनाती देने की व्यवस्था की है। विवाहित महिला शिक्षामित्रों को मायके या ससुराल के निकट विद्यालय में म्यूचुअल ट्रांसफर की सुविधा दी जाएगी।




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