मासूम से दरिंदगी के मामले में महज 17 दिन में आया फैसला, आरोपी को उम्रकैद
गोरखपुर में मासूम से दुष्कर्म के आरोपी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।वहीं, बेटे को बचाने के लिए साक्ष्य छिपाने वाली मां को भी चार साल की सजा दी है। कोर्ट का यह फैसला चार्जशीट दाखिल करने के 17वें कार्य दिवस में ही आ गया।

यूपी के गोरखपुर में मासूम के साथ हैवानियत करने वाले आरोपी को कोर्ट ने 17 दिन में सजा सुना दी है। दरअसल, छह साल की मासूम से हैवानियत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पाक्सो कोर्ट अशोक कुमार यादव ने मंगलवार को आरोपितों पर फैसला सुना दिया। आरोपित युवक को जहां कोर्ट ने उम्रकैद (जिंदा रहने तक जेल) की सजा सुनाई है, वहीं, बेटे को बचाने के लिए साक्ष्य छिपाने वाली मां को भी चार साल की सजा दी है। कोर्ट का यह फैसला चार्जशीट दाखिल करने के 17वें कार्य दिवस में ही आ गया। जिले का यह पहला मामला होगा, जिसमें इतने कम दिन में फैसला आया है। युवक और उसकी मां घटना के बाद से ही जेल में हैं।
सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा थाना क्षेत्र की रहने वाली बच्ची अपने दादा-दादी के साथ पीपीगंज इलाके के एक गांव में शादी समारोह में शामिल होने आई थी। 21 फरवरी की रात वरमाला कार्यक्रम के दौरान सारखी उर्फ मेहवरिया गांव के रहने वाले आरोपी अशोक निषाद ने बच्ची को बहला-फुसलाकर बाग में ले जाकर हैवानियत की और बेहोशी की हालत में छोड़कर भाग गया। बच्ची के न मिलने पर तलाश शुरू हुई तो शादी में आए ड्रोन की मदद से आरोपित की पहचान हो गई। इसमें वह बच्ची को ले जाते दिख रहा था।
बाग से बच्ची के बेहोश हालत में मिलने पर परिजनों ने पीपीगंज पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बच्ची को जंगल कौड़ियां सीएचसी में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत बताई। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर उसका इलाज कराया गया। उधर, अशोक की मां ने बेटे को बचाने के लिए खून से सना उसका कपड़ा धुल दिया था और उसे भूसे वाले घर में छिपा दिया था।
बचे हुए जीवन काल तक अशोक को काटनी है सजा
अशोक निषाद पुत्र दुन्दुनिया को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा-6 के तहत दोषी ठहराया गया। अदालत ने उसे शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक के लिए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा अशोक निषाद को भारतीय न्याय संहिता की धारा 238ए के तहत चार वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। जुर्माना न देने पर दो माह की अतिरिक्त सजा तय की गई है।
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि उसकी सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं, अशोक की मां सहआरोपी सुनीता देवी पत्नी टुनटुन निषाद को भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 238ए के तहत चार वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों दोषियों द्वारा पहले से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही, लगाए गए कुल अर्थदंड की राशि पीड़िता को उसकी शिक्षा, जीवन-यापन और पुनर्वास के लिए प्रदान की जाएगी। न्यायालय ने दोनों दोषियों का सजायाफ्ता वारंट बनाकर उन्हें जिला कारागार गोरखपुर भेजने का आदेश दिया है।
छह घंटे में हो गई थी आरोपित की गिरफ्तारी
आरोपितों को सजा दिलाने में थानेदार से लेकर पुलिस अफसरों तक ने काफी अहम भूमिका निभाई है। पुलिस ने छह घंटे के अंदर आरोपित को पकड़कर न सिर्फ घटना का खुलासा किया बल्कि पांच दिन में विवेचक अरुण सिंह ने चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल शुरू करा दिया। 15वें कार्य दिवस पर न्यायालय में इस केस में बहस पूरी कर आरोपी युवक अशोक निषाद और उसकी मां पर फैसला सुरक्षित कर लिया। 17वें कार्यदिवस तक कोर्ट का फैसला आ गया। इस फैलसे पर एसएसपी डा. कौस्तुभ, एसपी नार्थ ज्ञानेन्द्र ने कहा कि बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध पर आरोपितों को जल्द सजा दिलाने का लक्ष्य रखा गया था।




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