Upon hearing court verdict daughter hugged her mother and started crying while husband JE remained unperturbed dock कोर्ट का फैसला सुनते ही मां से लिपटकर रोने लगी दुर्गावती, कठघरे में अविचलित रहा जेई रामभवन, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कोर्ट का फैसला सुनते ही मां से लिपटकर रोने लगी दुर्गावती, कठघरे में अविचलित रहा जेई रामभवन

बांदा में जनपद न्यायालय परिसर में शुक्रवार को पूरे दिन गहमागहमी रही। पॉक्सो अदालत के कठघरे में जेई रामभवन गुमसुम खड़ा रहा। करीब एक घंटे बाद वह कठघरे में किनारे अपना माथा पकड़कर बैठ गया।

Fri, 20 Feb 2026 09:27 PMDinesh Rathour बांदा
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कोर्ट का फैसला सुनते ही मां से लिपटकर रोने लगी दुर्गावती, कठघरे में अविचलित रहा जेई रामभवन

यूपी के बांदा में जनपद न्यायालय परिसर में शुक्रवार को पूरे दिन गहमागहमी रही। पॉक्सो अदालत के कठघरे में जेई रामभवन गुमसुम खड़ा रहा। करीब एक घंटे बाद वह कठघरे में किनारे अपना माथा पकड़कर बैठ गया। वहीं दुर्गावती भी पास ही बेंच पर बैठी कभी फफक कर रोती तो कभी गुमसुम होकर बैठ गई। यौन शोषण मामले में शाम 3:11 बजे जैसे ही अदालत ने फांसी का फैसला सुनाया, दुर्गावती मां से लिपककर रोने लगी। दोनों ने कोर्ट से बाहर लाकअप में जाते समय किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में सुबह करीब 11 बजे पुलिस अभिरक्षा में दोनों दोषी पहुंच गए। इस बीच सीबीआई के इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम कुमार, लोक अभियोजक सीबीआई दारा सिंह मीणा और सहायक लोक अभियोजक सौरभ सिंह आदि भी कोर्ट के अंदर उपस्थित रहे। दोनों पति-पत्नी की अभिरक्षा में करीब 20 महिला व पुरुष जवान मुस्तैद रहे। इस बीच जेई रामभवन अदालत के अंदर कठघरे में खड़ा रहा और उसके चेहरे पर पछतावे के भाव नजर आए। बगल ही बेंच पर पत्नी दुर्गावती दो महिला पुलिस कर्मियों की अभिरक्षा में गुमसुम बैठी थी।

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करीब एक बजे जब प्रयागराज निवासी मां रामदुलारी पत्नी सत्यनारायण पहुंचीं तो दुर्गावती उनसे लिपटकर रो पड़ी। कहा-मां हमने तो कुछ नहीं किया। रामदुलारी ने उसे सांत्वना दी। इसके बाद मां बाहर बेंच पर आकर बैठ गई। इसी बीच कई बार दुर्गावती ने कठघरे में खड़े पति रामभवन से कुछ बात करने का प्रयास किया पर पुलिस कर्मियों ने उसे रोक दिया। जैसे ही अदालत ने फैसला सुनाया, एक बार फिर दुर्गावती अपनी मां से लिपटकर रोई। चार बजे कोर्ट से दुर्गावती व रामभवन को करीब 50 मीटर दूर लॉकअप में ले जाया गया। इस बीच मीडिया कर्मियों ने दोनों से कई सवाल किए पर रामभवन चुप र। दुर्गावती ने बस इतना कहा कि मेरे साथ गलत हुआ।

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पांच साल में बदले तीन जज, चौथे ने सुनाया फैसला

जेई रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा तक पहुंचाने से पहले तीन जज बदल गए। जब 2020 में इंटरपोल के जरिए यह मामला उजागर हुआ और न्यायालय पहुंचा तब विशेष न्यायाधीश पॉस्को अहमद शाह थे। इसके बाद अनु सक्सेना ने मामले में सुनवाई की। उनके तबादले के बाद पॉस्को कोर्ट में हेमंत कुशवाहा ने सुनवाई की। अब मौजूदा समय में पॉस्को के विशेष न्यायाधीश के पद पर प्रदीप कुमार मिश्रा हैं। उन्होंने अपने 163 पेज के फैसले में जेई रामभवन और पत्नी दुर्गावती को मृत्यु दंड की सजा सुनाई।

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ननदोई ने पता नहीं किस बात की सजा दिलाई

बांदा। दुर्गावती की मां रामदुलारी ने कहा कि बेटी के ननदोई ने पता नहीं बेटी-दामाद को किस बात की सजा दिलाई है। ये दोनों बेकसूर हैं। वह अपनी बेटी के घर बीच-बीच में जाती रही, पर कहां से बच्चे आते थे और क्या होता था। हमे कुछ भी पता नहीं चला। दामाद दस बजे ड्यूटी कर आते थे। यह बात बताते-बताते रामदुलारी फफक कर रो पड़ीं। कहा कि बेटी दुर्गावती के पेट में पथरी है और वह गंभीर रूप से बीमार है। सीबीआई के फर्जी चक्रव्यूह में दोनों फंस गए हैं। तीन बेटियां व दामाद हैं। एक दामाद प्रयागराज में रहता है और दो यहां बांदा में हैं। सजा होने के बाद जब बेटी-दामाद लाकअप में चले गए तो मां पीछे-पीछे उनके पास तक गई और फिर वापस कोर्ट लौटी। इस बीच रास्ते में इतना भर कहा कि अब तो जो होना था, वह हो गया, क्यों परेशान कर रहे हैं। सजा के संबंध में उन्होंने अपने पति जो पूर्ति निरीक्षक रहे हैं, उन्हें भी फोन पर जानकारी दी।

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