यूपी पंचायत चुनाव में देरी से ग्राम प्रधान परेशान, योगी सरकार के सामने रख दी ये मांग
ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने कहा कि सरकार अगर किन्हीं कारणों से चुनाव समय से नहीं करा पाती है तो मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हर ग्राम पंचायत में विकास के काम बाधित रहे। प्रधानों ने सरकार को पूरा सहयोग किया।

UP Panchayat Chunav : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव अब मई-जून के तय समय पर होने मुश्किल हैं। पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट का प्रकाशन पहले 22 अप्रैल को होना था लेकिन अब इसे 30 जून तक टाल दिया गया है। ऐसे में प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे भावी उम्मीदवारों के साथ ही वर्तमान प्रधानों की चिंता भी बढ़ गई है। पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने योगी सरकार से प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाए जाने की मांग की है। बुधवार को हजरतगंज स्थित डिप्लोमा इंजीनियरिंग संघ भवन में आयोजित ग्राम प्रधान संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश भर से आये प्रधानों ने यह मांग रखी।
ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने कहा कि सरकार अगर किन्हीं कारणों से चुनाव समय से नहीं करा पाती है तो वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हर ग्राम पंचायत में विकास कार्य बाधित रहे। प्रधानों ने सरकार को पूरा सहयोग किया। इसलिए जनहित और गांव के विकास के लिए ग्राम प्रधानों का कार्यकाल ही बढ़ाना सबसे उत्तम होगा। इससे बचे हुए काम आसानी से हो सकेंगे और ग्रामीण जनता को इसका फायदा मिलेगा। बैठक में दिनेश चन्द्र मिश्रा, जयप्रकाश दुबे, राजीव पाल, हरस्वरूप व्यास, सम्पूर्णानंद समेत प्रदेश भर के तमाम प्रधान शामिल हुए।
26 मई को खत्म हो जाएगा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म होने जा रहा है। कहा जा रहा है कि पंचायत चुनाव में देरी पर कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है या प्रशासक बैठाए जा सकते हैं। इस बीच प्रशासन ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायत स्तर पर किए जाने वाले सभी काम 25 मई 2026 तक उपलब्ध धनराशि के अनुरूप ही कराए जाएं, ताकि कार्यकाल समाप्ति के बाद किसी प्रकार का बकाया न रह जाए। यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में उपलब्ध धनराशि से अधिक व्यय या काम नहीं कराए जाएं। यदि ऐसा पाया जाता है और भुगतान को लेकर विवाद या वैधानिक कार्यवाही की स्थिति आती है तो संबंधित ग्राम पंचायत सचिव जिम्मेदार होंगे।
बैठक में उठीं ये समस्याएं
-जल-जीवन मिशन के तहत खोदी गई गलियां व सड़कों का निर्माण।
- खराब पड़े हैंडपम्प रिबोर हों और नये हैंडपम्प लगाये जाएं।
- अधिक संख्या में पौधरोपण कराया जाए ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
- तालाबों को अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
-पंचायतों को विकास के लिए धनराशि दी जाए।




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