खाने की कमी नहीं, मिसाइलों से लग रहा डर; एलपीजी शिप पर फंसी यूपी की इंजीनियर बिटिया
मैनपुरी की मैरीन इंजीनियर अंजलि आर्य ईरान-इजराइल युद्ध के चलते ओमान की खाड़ी में एक एलपीजी लाने गए शिप पर फंसी हुई हैं। उन्होंने अपने परिजनों को बताया कि पास के एक जहाज को मिसाइल से उड़ा दिया गया है, जिससे वहां अत्यधिक खौफ का माहौल है।

युद्ध की विभीषिका कितनी डरावनी होती है, इसका अहसास यूपी के मैनपुरी के किशनी निवासी अवधेश कुमार के परिवार से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। उनकी 21 वर्षीय बेटी अंजलि आर्य, जो सिंगापुर की एक प्रतिष्ठित शिपिंग कंपनी में मैरीन इंजीनियर है, इस समय युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे एक एलपीजी लाने गए शिप पर तैनात है। अंजलि ने जब चार दिन बाद अपने माता-पिता से संपर्क किया, तो उसकी बातों में साहस और डर का मिला-जुला अहसास था। उसने बताया कि जहाज पर राशन की तो कमी नहीं है, लेकिन आंखों के सामने गिरती मिसाइलें रूह कंपा देने वाली हैं।
आंखों के सामने उड़ाया गया पास वाला शिप
अंजलि ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए बताया कि वह जिस ओमान की खाड़ी में फंसी हुई है, वहां स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। उसने बताया, "मां, मैं ठीक हूं। जहाज पर एक महीने का राशन है, इसलिए खाने-पीने की कोई समस्या नहीं है। लेकिन डर लग रहा है। हमारे पास ही खड़े एक दूसरे शिप को ईरान ने मिसाइल से उड़ा दिया है।" इस खौफनाक मंजर की जानकारी देने के बाद अंजलि का संपर्क टूट गया, जिससे परिवार की धड़कनें बढ़ गईं। चार दिनों के लंबे और बेचैन करने वाले इंतजार के बाद शुक्रवार शाम को दोबारा बात हुई, तो अंजलि ने खुद को सुरक्षित बताया, लेकिन जहाज के आगे बढ़ने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं मिल सकी है।
कोलकाता से सिंगापुर तक का सफर और युद्ध का संकट
सदर बाजार निवासी अवधेश कुमार, जो एक प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं, बताते हैं कि अंजलि शुरू से ही मेधावी रही है। उसने इंडियन मेरीटाइम यूनिवर्सिटी कोलकाता से 2025 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और तत्काल बाद सिंगापुर की कंपनी में बतौर इंजीनियर नियुक्त हुई। अंजलि का शिप 5 मार्च को गुजरात से एलपीजी लेने के लिए ईरान के लिए रवाना हुआ था। इसी बीच ईरान और इजराइल के बीच तनाव युद्ध में तब्दील हो गया और सुरक्षा कारणों से जहाज को ओमान की खाड़ी में ही रोक दिया गया।
ईश्वर से सुरक्षित वापसी की प्रार्थना
मां रेखा देवी और पिता अवधेश कुमार अपनी बेटी की सलामती के लिए दिन-रात प्रार्थना कर रहे हैं। नेटवर्क की समस्या के कारण अंजलि से नियमित बात नहीं हो पा रही है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी रहती है। अंजलि ने बताया कि वह और क्रू के अन्य सदस्य सुरक्षित स्थान पर रुकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पास के जहाजों पर हुए हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, मैनपुरी का यह परिवार सरकार और शिपिंग कंपनी की ओर टकटकी लगाए बैठा है कि कब उनकी लाड़ली सुरक्षित घर वापस आएगी।




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