UP LPG Crisis GST Registration Mandatory for Commercial Cylinders Action if usage shown wrong कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी, गिनती में गड़बड़ी पर फंसेंगे कारोबारी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी, गिनती में गड़बड़ी पर फंसेंगे कारोबारी

कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए जीएसटी अनिवार्य कर दिया गया है। नियम पहले से है लेकिन अब सख्ती शुरू हो गई है। आईआईए लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन विकास खन्ना ने बताया कि जीएसटी पंजीयन वालों को ही सिलेंडर मिल रहा है। इसके बावजूद यदि किसी को 10 सिलेंडर की जरूरत है तो उसे दो सिलेंडर मिल रहे हैं।

Fri, 27 March 2026 11:22 AMSrishti Kunj प्रमुख संवाददाता, लखनऊ
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कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी, गिनती में गड़बड़ी पर फंसेंगे कारोबारी

कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए जीएसटी अनिवार्य कर दिया गया है। नियम पहले से है लेकिन अब सख्ती शुरू हो गई है। इसके बाद से 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के लिए जो एजेंसियों पर सुबह से शाम तक कारोबारियों की कॉल आ रही थीं, न के बराबर रह गई हैं। वजह यह है कि ज्यादातर छोटे दुकानदारों ने जीएसटी पंजीकरण नहीं कराया। दूसरी ओर बड़े विक्रेता कॉमर्शियल सिलेंडर से बचने का रास्ता खोजने में लग गए हैं। वजह यह है कि सिलेंडर ज्यादा लिए और जीएसटी में उनके लिहाज से उत्पादन कम दिखाया तो फंस जाएंगे।

लखनऊ में करीब 50 हजार पंजीकृत छोटे कारोबारी हैं जो खानपान से जुड़े ढाबे चलाते हैं या ठेले-खोमचों पर खाद्य पदार्थ बचे रहे हैं। इनमें से करीब 48 हजार ऐसे हैं जिनको एलपीजी गैस सिलेंडर की जरूरत होती है। अभी तक अपने घर के 14 किलोग्राम वाले सिलेंडरों से काम चला रहे थे। इनमें से कुछ ने कॉमर्शियल सिलेंडर लिया तो था लेकिन लम्बे समय से रीफिल नहीं कराया। उदयगंज, डायमंड डेयरी के आसपास करीब 250 लोगों ने कॉमर्शियल सिलेंडर लिया था।

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ये होंगे बदलाव

- इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छोटे दुकानदारों को नहीं मिलेगा सिलेंडर

- चाय-पकौड़ी की दुकान लगाने वाले किसी का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं

- बड़े मिठाई विक्रेता, रेस्टोरेंट चेन भी कॉमर्शियल सिलेंडर से बचने का रास्ता खोज रहे

- सिलेंडर ज्यादा लिया और जीएसटी में उत्पादन कम दिखाया तो फंसने का खतरा

- जीएसटी में जितना उत्पादन घोषित करते हैं उतने ही वैध सिलेंडर लेते हैं, बाकी ब्लैक में

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जीएसटी के नियम पर पीछे हटे बड़े कारोबारी

मिठाई की दुकान या रेस्टोरेंट चलाने वाले भी सामने नहीं आ रहे हैं। एजेंसियों से सम्पर्क करने पर पता चला कि जहां 90 से 100 कॉमर्शियल कनेक्शन हैं वहां सिर्फ 8 से 10 ने रुचि दिखाई है। यानी सिलेंडर की मांग की है और जीएसटी नम्बर देने को तैयार हैं। इसकी वजह यह है कि यदि एक रेस्टोरेंट संचालक जीएसटी नम्बर देकर कॉमर्शियल सिलेंडर लेता है तो रिकॉर्ड में आ जाएगा।

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उद्योगों के लिए संकट, कम मिल रहे सिलेंडर

आईआईए लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन विकास खन्ना ने बताया कि जीएसटी पंजीयन वालों को ही सिलेंडर मिल रहा है। इसके बावजूद यदि किसी को 10 सिलेंडर की जरूरत है तो उसे दो सिलेंडर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ की चारों औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना 1800 से 2000 सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन 15-20 प्रतिशत ही मिल पा रहा है। सरकार को औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी लाइन बिछानी चाहिए।

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