एलपीजी संकट में मुनाफाखोरी; गैस की दिक्कत के बीच इंडक्शन के दाम दोगुने, और बढ़ेगी कीमत
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग से एलपीजी सिलेंडर की किल्लत हो गई है। खाना पकाना मुश्किल है तो वहीं रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो रही है। मार्केट में बिक रहे इंडक्शन चूल्हे की कीमत पिछले 25 दिनों में डबल हो गई हैं। अगले महीने से चुनिंदा माडलों पर 10 से 15% तक और बढ़ सकती हैं।

Gorakhpur News: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भीषण जंग से गोरखपुर के लाखों परिवारों का किचन प्रभावित हो रहा है। खाना पकाना मुश्किल है तो वहीं रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो रही है। रसोई गैस के विकल्प के रूप में मार्केट में बिक रहे इंडक्शन चूल्हे की कीमत पिछले 25 दिनों में डबल हो गई हैं। इसके बावजूद जितना इंडक्शन दो साल में बिकता है, उतना पिछले 25 दिनों में बिक गया है। इंडक्शन चूल्हा का निर्मित करने वाली कंपनियों ने अगले माह से चुनिंदा माडलों पर 10 से 15% तक कीमत बढ़ाने की सूचना अपने डीलरों को दी है।
विजय चौक पर इलेक्ट्रिकल्स के कारोबारी आनंद रूंगटा का कहना है कि कीमत बढ़ोतरी अप्रैल महीने से प्रभावी हो सकती है। फिलहाल जो इंडक्शन 20 दिन पहले 2200 से 2500 रुपये में बिक रहा था, उसकी कीमत वर्तमान में 4000 रुपये के पार पहुंच गई है। गोरखपुर इलेक्ट्रिकल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव रस्तोगी बताते हैं कि रेती रोड के ज्यादातर दुकानों पर इंडक्शन चूल्हा नहीं मिल रहा है। सामान्य दिनों में एक दुकानदार महीने भर में 5 से 7 इंडक्शन चूल्हा बेचता था। वर्तमान में उपलब्धता है तो एक दिन में 15 से 20 इंडक्शन की बिक्री हो रही है।
कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर किया ई-मेल
क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी और सिलेंडर की किल्लत को लेकर फैक्ट्रियां अपने डीलरों को सतर्क कर रही हैं। प्लास्टिक की पाइप बनाने वाली गुजरात की प्रमुख कंपनी ने डीलरों को अप्रैल के मध्य तक कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर ई-मेल किया है। जिसमें कहा गया है कि अप्रैल मध्य तक प्लास्टिक की कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। विजय चौक पर कारोबारी आनंद रूंगटा का कहना है कि बोरिंग के साथ वायरिंग में पाइप का इस्तेमाल होता है। बड़ी कंपनियों की यूनिटें बंद हो रही हैं। अप्रैल मध्य तक प्लास्टिक उत्पादों की जबरदस्त शार्टेज हो सकती है।
उद्योग: बर्तन की फैक्ट्री सिलेंडर के अभाव में बंद
कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता नहीं होने से बर्तन की फैक्ट्रियां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। बरगदवा क्षेत्र में तीन बर्तन की फैक्ट्री हैं। जिसमें एक के बंद होने की सूचना है। हालांकि फैक्ट्री मालिक बंदी को लेकर बोलने से बच रहे हैं। वहीं, प्लास्टिक दाने की महंगाई के साथ ही किल्लत को देखते हुए गीडा में स्थापित 50 से अधिक फैक्ट्रियां भीषण संकट से जूझ रही हैं। प्लास्टिक के दाने की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्लास्टिक बोरा बनाने वाली यूनिटों के साथ ही पैकेजिंग मटेरियल पर पड़ रहा है। अब कच्चा माल अधिक कीमत पर भी नहीं मिल रहा है। ट्रांसपोर्टरों की तरफ से भी दिक्कत आ रही है।




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