रसोई गैस संकट से निबटने को योगी सरकार का मास्टर प्लान, प्रदेश और जिला स्तर पर कमेटियां रखेंगी नजर
खाड़ी युद्ध के कारण रसोई गैस और सीएनजी की संभावित किल्लत को रोकने के लिए यूपी सरकार ने राज्य और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां गठित की हैं। मुख्य सचिव और डीएम के नेतृत्व में ये समितियां ईंधन की निर्बाध आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करेंगी।

खाड़ी में ईरान के साथ इजराइल और अमेरिका के युद्ध के चलते ईंधन और रसोई गैस की आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सरकार ने प्रदेश भर में रसोई गैस और सीएनजी के वितरण की कड़ी निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर विशेष कमेटियों का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशों के क्रम में उठाया गया है ताकि युद्ध काल के दौरान आम जनता को ईंधन की किल्लत का सामना न करना पड़े।
राज्य स्तरीय समिति: मुख्य सचिव संभालेंगे कमान
प्रदेश स्तर पर गठित की गई उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। इस कमेटी का मुख्य कार्य पेट्रोलियम उत्पादों की आवक और वितरण के बीच सामंजस्य बिठाना होगा। इस समिति में नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन, लोक निर्माण (PWD), सिंचाई, परिवहन, राजस्व और खाद्य एवं रसद विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिवों को सदस्य बनाया गया है।
इसके साथ ही, खाद्य एवं रसद आयुक्त, 'इन्वेस्ट यूपी' के सीईओ, स्थानीय निकाय निदेशक और भारतीय तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक भी इस टीम का हिस्सा होंगे। यह विशाल प्रशासनिक ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि डिपो से लेकर वितरकों तक गैस की सप्लाई चेन में कहीं भी कोई रुकावट न आए।
जिला स्तरीय समिति: डीएम की अध्यक्षता में ग्राउंड मॉनिटरिंग
जमीनी स्तर पर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई गई है। इस कमेटी में पुलिस कमिश्नर या एसएसपी/एसपी, नगर आयुक्त, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शामिल होंगे।
बिजली विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता, आरटीओ, जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और संबंधित गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह दी गई है। यह कमेटी स्थानीय स्तर पर जमाखोरी रोकने, वितरण केंद्रों पर भीड़ प्रबंधन और होम डिलीवरी की व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जिम्मेदार होगी।
संकट समाप्त होने तक नियमित बैठकें
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक ये दोनों कमेटियां नियमित रूप से बैठकें करेंगी। किसी भी प्रकार की कमी या वितरण में धांधली की सूचना मिलने पर डीएम की कमेटी तत्काल निराकरण करेगी, जबकि बड़े नीतिगत अवरोधों को राज्य स्तरीय कमेटी दूर करेगी। इस 'डबल लेयर' मॉनिटरिंग का उद्देश्य युद्ध की स्थिति में भी उत्तर प्रदेश के हर घर की रसोई को सुरक्षित रखना है।




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