निरंकुश हो गए अधिकारी, मेरी नहीं सुनते, मेयर का छलका दर्द, सीएम योगी से लगाएंगी गुहार
आगरा नगर निगम के इतिहास में सोमवार को एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब मेयर हेमलता दिवाकर द्वारा बुलाए गए सदन का नगर आयुक्त समेत सभी अधिकारियों ने बहिष्कार कर दिया। खाली कुर्सियों के बीच अकेली बैठीं मेयर का दर्द छलक पड़ा और उन्होंने अधिकारियों को 'निरंकुश' बताते हुए जनता के अपमान का आरोप लगाया।

आगरा में नगर निगम के इतिहास में सदन की अलग ही तरह की बैठक हुई। मेयर अपनी डायस पर अकेली बैठीं और बराबर की कुर्सियां खाली रहीं। पार्षद अपने नियत स्थानों पर बैठे और अधिकारियों की दीर्घा पूरी तरह खाली रही। जब विपक्ष ने मेयर से जवाब मांगा तो उन्होंने खुलकर कहा कि अधिकारी निरंकुश हो गए हैं। मनमानी कर रहे हैं। जनता के प्रति गंभीर नहीं हैं। मेरी सुनते नहीं हैं। मुझे खुशी है कि जनता की बात रखने के लिए पार्षद यहां मौजूद हैं और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर मैं मुख्यमंत्री से मिलूंगी।
सोमवार को मेयर हेमलता दिवाकर ने नगर निगम के सामान्य सदन की बैठक बुलाई थी। नगर आयुक्त ने लोकसभा की कार्यवाही जारी रहने और शहर में सार्वजनिक उपक्रम समिति के आगमन का हवाला देकर बैठक टालने की मांग की थी। सचिवालय से एजेंडा भी जारी नहीं किया गया था। इसके बावजूद मेयर तय समय पर करीब 11:30 बजे सदन में पहुंच गईं। भाजपा के अधिकांश पार्षदों ने भी सदन कक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। कुछ देर बाद बसपा सहित अन्य विपक्ष के पार्षद भी पहुंच गए। करीब चार महीने बाद सदन की बैठक हो रही थी, इसलिए पत्रकार दीर्घा भी खचाखच भरी हुई थी।
हैरानी तब हुई जब अधिकारियों की दीर्घा पूरी तरह खाली रही और मेयर के साथ डायस पर बैठने वाले नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मुख्य वित्त नियंत्रक सहित कई अधिकारी गायब थे। डायस पर मेयर अकेली बैठी थीं। कार्यवाही शुरू होते ही पार्षदों ने इस बात की निंदा शुरू कर दी कि मेयर द्वारा सदन बुलाने के बाद भी सभी अधिकारी नदारद हैं। जब बसपा पार्षद सुहेली कुरैशी ने जवाब मांगा तो मेयर ने कहा कि इसके जिम्मेदार नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल हैं, जो समय से सूचना नहीं देते। बैठक का एजेंडा भी जारी नहीं किया गया है।
लोकसभा की कार्यवाही और सार्वजनिक उपक्रम समिति के आगमन की सूचना आज सुबह नौ बजे दी गई। इस पर बसपा पार्षद कप्तान सिंह ने कहा कि जब कार्यपालक मौजूद नहीं हैं तो यह सदन का अधिवेशन नहीं हो सकता, यह केवल पार्षदों की बैठक मात्र है। हमें सूचना तक नहीं मिली। अखबारों से जानकारी मिली है। इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि अधिकारी सदन से गायब हों।
कप्तान सिंह ने कहा कि 140 करोड़ रुपये की एफएफसी की फाइलें धूल फांक रही हैं। यह पैसा लैप्स हो जाएगा। मेयर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती हैं और सीएम से शिकायत भी करती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। इसका जवाब कौन देगा। भाजपा पार्षद हेमंत प्रजापति ने कहा कि हम किसी की कठपुतली नहीं हैं।
सदन की बैठक का एजेंडा समय से जारी होना चाहिए था। कोई समिति आई है तो नगर आयुक्त या संबंधित अधिकारी वहां हो सकते हैं, लेकिन अन्य अधिकारियों को सदन में होना चाहिए था। भीम नगरी पर चर्चा करनी थी। शरद चौहान ने कहा कि अधिकारियों की निंदा करते हैं। उन्होंने केवल पार्षदों ही नहीं, शहर की जनता का भी अपमान किया है। बसपा पार्षद सुनील शर्मा ने मेयर का समर्थन किया।
रवि माथुर ने कहा कि नगर निगम में नियमावली का पालन नहीं हो रहा है। पंकज गुप्ता ने कहा कि केंद्र और प्रदेश में सरकार हमारी है, ऐसे अधिकारियों को हटाने की जरूरत है। जितेंद्र पिप्पल ने अधिकारियों को हटवाने की मांग की। भाजपा पार्षद दल के उपनेता प्रकाश केशवानी ने कहा कि सदन का एजेंडा जारी न करना अधिकारियों की गलती है। यह मेयर के अधिकारों का हनन है। इस पर निंदा प्रस्ताव पारित हो व जो सदन नहीं हुए हैं उनकी भरपाई के लिए हर महीने सदन की बैठक की जाए।
सुधीर राठौर, प्रवीना राजावत, पिंकी, रेखा भास्कर आदि पार्षदों ने विरोध किया। कांग्रेस पार्षद आरती शर्मा ने नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की। बैठक की कार्रवाई समाप्त होने तक करीब 72 पार्षदों ने निंदा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
मेयर ने कहा कि जब लोग कहते हैं कि मेरी नगर आयुक्त से नहीं बनती है, तो मैं कहना चाहती हूं कि ऐसे निरंकुश अधिकारियों से मेरी कभी नहीं बनेगी, जो जनता के हितों की अनदेखी करते हैं। इस संबंध में मैंने 22 मार्च को मंडलायुक्त से बैठक कर चर्चा की और जिलाधिकारी को भी सूचित किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ती रहूंगी और यह मामला सीएम के समक्ष रखूंगी।




साइन इन