यूपी के इस जिले की ग्राम पंचायतों में भुगतान की ऐसी होड़, ग्राम प्रधानों ने 3 दिन में निकाले 4.15 करोड़ रुपए
यूपी की कई ग्राम पंचायतों में भुगतान की ऐसी होड़ मची है कि तीन दिन में 4 करोड़ 15 लाख 71 हजार का भुगतान हो चुका है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि पांच साल में विकास कहां था। ग्रामीण भी यही सवाल पूछ रहे हैं।

यूपी के फर्रुखाबाद जनपद में लगभग ग्राम पंचायतों में 26 मई को प्रधान अपनी कुर्सी से उतर जाएंगे। कुर्सी पर उतरने के अंतिम दिनों में सरकारी खजाने को खाली करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। ग्राम पंचायतों में भुगतान की ऐसी होड़ मची है कि तीन दिन में 4 करोड़ 15 लाख 71 हजार का भुगतान हो चुका है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि पांच साल में विकास कहां था। ग्रामीण भी यही सवाल पूछ रहे हैं। कार्यकाल के अंतिम समय में तीन दिनों में इतना बड़ा भुगतान कहीं न कहीं जांच का विषय भी हो सकता है।
जनपद में कुल 580 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें अधिकतर ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। निदेशक पंचायती राज की ओर से मांगी गई सूचना पर पूरी रिपोर्ट दिसंबर माह में ही भेजी जा चुकी है। इसमें ग्राम पंचायतवार प्रथम बैठक की तारीख भी भेजी गयी है। दरअसल ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल निर्वाचन के बाद पहली बैठक से ही शुरू हो जाता है। शासन की ओर से अभी तक प्रशासक नियुक्त करने या कार्यकाल बढ़ाने को लेकर कोई भी आदेश नहीं आया है। इससे पहले ही प्रधानों को लग रहा है कि वह नियत समय में ही कुर्सी से उतर जाएंगे। ऐसे में ग्राम पंचायत खातों से पैसा निकालने की होड़ लगा दी गयी है।
जनपद की ग्राम पंचायतों में 20 मई को 9177512 रुपये, 21 मई को 16648607 और 22 मई को 15744969 रुपये का भुगतान हो चुका है। यानी 41571088 रुपये का भुगतान करा लिया गया है । ज्यादातर भुगतान नाली, सामग्री खरीद के नाम पर हुए हैं। 20 मई के बाद अचानक भुगतान बढ़ गये हैं। कई ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां एक एक दिन में पांच-पांच लाख तक के बिल पास कर दिये गये। प्रधानों को भी लग रहा है कि 26 मई की तारीख उनके लिए लक्ष्मण रेखा बन गयी है और इसी दिन खातों की चाबी छिन सकती है। कार्यकाल खत्म होने के अंतिम दिनों में 72 घंटो में जो हुआ है उसने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। गत महीने में ग्राम पंचायतों में रुपये निकालने की भगदड़ नहीं मची थी। खुद ही कई प्रधान सवालों के घेरे में हैं।
आखिर क्यों मची है होड़
प्रधानों को लग रहा है कि 26 मई के बाद उनके वित्तीय अधिकार सीज हो जाएंगे। खातों का संचालन प्रशासक के पास चला जायेगा। इसी डर से आनन फानन में बचे हुये बजट को ठिकाने लगाने से जुटे हैं। कई जगह जो भुगतान कराये गये हैं वह सभी सवालों के घेरे में हैं। जांच का डर सता रहा है।
खामियां प्रकाश में आने पर कार्रवाई
जिला पंचायत राज अधिकारी कपिल कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को खत्म होने को लेकर अभी कोई दिशा निर्देश शासन स्तर से नहीं मिले हैं। फिर भी यदि कहीं पर किसी ग्राम पंचायत में कोई खामियां प्रकाश में आती है तो इस पर बड़ी कार्रवाई होगी।




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