यूपी में स्मार्ट मीटर पर अधूरे आदेश का दंश झेलेंगे नया कनेक्शन लेने वाले, उपभोक्ताओं को पड़ेगा भारी
यूपी में बिजली का नया कनेक्शन लेने वाले स्मार्ट मीटर पर अधूरे आदेश का दंश झेलेंगे । नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को उन्हीं स्मार्ट मीटरों से कनेक्शन दिया जाएगा, जिनकी गुणवत्ता की जांच करवाई जा रही है।

UP News :यूपी में स्मार्ट मीटर पर पावर कॉरपोरेशन का अधूरा आदेश नया कनेक्शन लेने वालों पर भारी पड़ेगा। नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को उन्हीं स्मार्ट मीटरों से कनेक्शन दिया जाएगा, जिनकी गुणवत्ता की जांच करवाई जा रही है। गौरतलब है कि जांच रिपोर्ट आने तक पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटरों से बदलने की प्रक्रिया पर शनिवार को रोक लगा दी गई है।
पावर कॉरपोरेशन के शनिवार को जारी आदेश के बाद प्रदेश भर में नए कनेक्शन की मांग करने वाले खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जब मीटरों की गुणवत्ता की जांच हो रही है तो रिपोर्ट के पहले उन्हें ये मीटर क्यों थमाए जा रहे हैं? अगर जांच समिति की रिपोर्ट में इन मीटरों में खामी पाई जाती है तो उनके मीटर क्या दोबारा बदले जाएंगे? उपभोक्ताओं का यह भी सवाल है कि अगर मीटरों के तेज चलने की खामी को जांच समिति पुष्ट कर देती है तो उस रकम की भरपाई कैसे होगी, जो उन्होंने स्मार्ट मीटर की वजह से ज्यादा भुगतान किया है। पावर कॉरपोरेशन ने न केवल स्मार्ट मीटरों से नया कनेक्शन अनिवार्य बनाए रखा है, बल्कि कनेक्शन प्रीपेड मोड में भी दिए जाएंगे।
यह व्यवस्था केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की उस अधिसूचना के विपरीत है, जिसमें उसने कनेक्शन के प्रीपेड मोड में ही दिए जाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। सूत्रों के मुताबिक नए कनेक्शन में भी पावर कॉरपोरेशन रिवैंड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के ही मीटर इस्तेमाल कर रहा है। आरडीएसएस के मीटरों को प्रीपेड मोड में चलाए जाने की अनिवार्यता है, लिहाजा पावर कॉरपोरेशन पूरी तरह से सीईए की अधूसचना का पालन नहीं कर पा रहा है। वहीं, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक नए कनेक्शन में स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल को अनुचित मान रहे हैं।
पोस्टपेड मीटरों से दें नए कनेक्शन - उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब मीटर की गुणवत्ता जांच के दायरे में है तो उससे नए कनेक्शन नहीं दिए जाने चाहिए। नए उपभोक्ताओं को पोस्पेड मीटर से ही कनेक्शन दिया जाना चाहिए। अगर पावर कॉरपोरेशन के पास गैर स्मार्ट पोस्टपेड मीटर नहीं हैं तो उनकी तत्काल खरीद की जाए। स्टोर में उतारे गए पोस्टपेड मीटर भी इसमें इस्तेमाल हो सकते हैं क्योंकि वे अभी भी गारंटी अवधि में हैं। संचालन योग्य हैं। अवधेश ने स्मार्ट मीटरों में चीनी कंपोनेंट इस्तेमाल होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि मीटरिंग से जुड़ी एमडीएम व एचईएस प्रणाली की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
दस दिन में जांच रिपोर्ट पर भी सवाल
अवधेश ने कहा कि मीटरों की जांच जटिल मामला है, लिहााज दस दिनों में जांच रिपोर्ट का आदेश बेईमानी है। मीटर का सैंपल किसी राष्ट्रीय जांच लैब में जाएगा। वहां जांच होगी। इसके बाद ही मीटरों की गुणवत्ता प्रमाणित की जा सकती है। अवधेश ने जबरन प्रीपेड में बदले गए मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की मांग की है।




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