यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर अनिवार्य पर प्रीपेड जरूरी नहीं
यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को कानपुर में महत्वपूर्ण गाइडलाइन दी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन मीटर को प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है।

UP News: यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों पर प्रदेश में चल रही गहमागहमी के बीच उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को कानपुर में महत्वपूर्ण गाइडलाइन दी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन मीटर को प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है। आयोग ने कहा है कि अगर उपभोक्ता प्रीपेड मीटर नहीं लगवाना चाहता है तो उसका स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही रहने दिया जाए। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के मीटरिंग रेग्युलेशन में एक अप्रैल 2026 को हुए संशोधन का हवाला दिया। आयोग सोमवार को बृजेंद्र स्वरूप पार्क स्थित द स्पोर्ट्स हब (टीएसएच) में बिजली कंपनियों की टैरिफ दरों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर जनसुनवाई कर रहा था।
आयोग ने कहा कि सभी डिस्कॉम की जनसुनवाई पूरी होने के बाद दरों में बदलाव के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा। जनसुनवाई में आयोग के सचिव सुमित कुमार अग्रवाल, सदस्य संजय कुमार सिंह, निदेशक टैरिफ सरबजीत सिंह ढींगरा और केस्को एमडी सैमुअल पॉल एन मौजूद रहे। नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार ने कहा कि 28 फरवरी 2022 को भारत सरकार ने मीटर रेग्युलेशन की धारा 4-बी में प्रावधान किया था कि उपभोक्ताओं को दिया जाने वाला स्मार्ट मीटर कनेक्शन प्रीपेड मोड में दिया जाएगा। तब से स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जा रहे थे। एक अप्रैल 2026 को सरकार ने इसे वापस लेते हुए मीटरिंग रेग्युलेशन में संशोधन कर प्रीपेड मोड को हटा दिया है।
यानी स्मार्ट मीटर तो लगेंगे, लेकिन वह पोस्टपेड होगा या प्रीपेड, यह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा। बिना उपभोक्ता की सहमति के स्मार्ट मीटर प्रीपेड नहीं होंगे। प्रीपेड मीटर में दो फायदे हैं—बिजली बिल में दो प्रतिशत की छूट मिलती है और सिक्योरिटी मनी जमा नहीं करनी पड़ती। आयोग ने कहा कि प्रीपेड कनेक्शन वाले उपभोक्ता के मीटर का बैलेंस खत्म होने पर कटी बिजली रिचार्ज कराने के अधिकतम दो घंटे के भीतर जुड़ जानी चाहिए। प्रदेश भर में इसमें अधिक समय लगने की शिकायतों के कारण उपभोक्ताओं में नाराजगी होना स्वाभाविक है।
परिषद ने बिजली दरें बढ़ाने का किया खंडन
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि पॉवर कार्पोरेशन का छह साल तक बिजली दरों को न बढ़ाने का हवाला देते हुए 25 प्रतिशत बिजली महंगी करने करने का प्रस्ताव अवैध है। प्रदेश के उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये पहले से ही कार्पोरेशन पर बाकी है। इस सरप्लस को अदा किए बिना बिजली दरों को बढ़ाया नहीं जा सकता है बल्कि 45 प्रतिशत दरों को कम करना पड़ेगा। पांच साल तक लगातार आठ प्रतिशत की कमी कर 51 हजार करोड़ रुपये के सरप्लस को कम किया जा सकता है। 2001 से अब तक बिजली दरों को अंदाज से बढ़ाने और ऑडिट में वास्तविक जरूरी वृद्धि में अंतर की वजह से उपभोक्ताओं से 51 हजार करोड़ रुपये ज्यादा लिए गए हैं। इसी वजह से छह साल से बिजली दरें पॉवर कार्पोरेशन नहीं बढ़ा पा रहा है। उपभोक्ताओं पर एहसान नहीं कर रहा है। उन्होंने जबरन प्रीपेड मीटरों को लगाने को गैरकानूनी कहते हुए बिजली कंपनियों का लाइसेंस खत्म करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
आयोग की जनसुनवाई में प्रमुख बिंदु
- भवन मालिक अपने किरायेदार को बिजली कनेक्शन देने के लिए कराए एग्रीमेंट में प्रीपेड मीटर ही दिए जाने का प्रस्ताव कर सकता है।
- बिजली इस्तेमाल न करने पर भी कनेक्शन पर पूरा फिक्स चार्ज लेने पर आयोग ने कहा कि कार्पोरेशन बिजली देने के अतिरिक्त खर्च का एक तिहाई ही फिक्स चार्ज के रूप में ले रहा।
- उद्यमी सुनील गुप्ता की शिकायत थी कि उनके बिजली बिल में पॉवर फैक्टर नहीं प्रदर्शित होता है। इस पर आयोग ने केस्को को निर्देश दिए।
- केस्को में लाइनलॉस कम करने और ट्रांसफॉर्मर डैमेज का अनुपात राष्ट्रीय मानक से भी कम होने पर आदर्श श्रेणी बताया।
- गैरऊर्जीकृत क्षेत्र में कनेक्शन वाले प्लॉट पर 70 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से धनराशि जमा कर और ऊर्जीकृत में 100 से 300 मीटर दूरी से भी बिजली कनेक्शन सप्लाई अफोर्डिंग चार्ज देकर मिलेगा।




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