up cm s discretionary fund gives away rs 860 crore in one year know how to get help through this यूपी में सीएम विवेकाधीन कोष से एक साल में दिए 860 करोड़, जानें कैसे पा सकते हैं सहायता, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

यूपी में सीएम विवेकाधीन कोष से एक साल में दिए 860 करोड़, जानें कैसे पा सकते हैं सहायता

विवेकाधीन कोष के तहत 50,000 रुपए जैसी छोटी सहायता से लेकर कई मामलों में तीन करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी स्वीकृतियां प्रदान की गईं हैं। योगी सरकार ने हर स्तर की जरूरत को प्राथमिकता दी है। चाहे वह व्यक्तिगत चिकित्सा सहायता हो, आकस्मिक दुर्घटना हो या अन्य आपात स्थिति।

Sun, 5 April 2026 04:51 PMAjay Singh लाइव हिन्दुस्तान
share
यूपी में सीएम विवेकाधीन कोष से एक साल में दिए 860 करोड़, जानें कैसे पा सकते हैं सहायता

UP News: उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से वित्तीय वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक) में लगभग 860 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों के जरिए 50 हजार से अधिक लाभार्थियों तक पहुंची है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि चाहे सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधि हों या विपक्ष के, सभी के जरिए जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई गई है। इसके जरिए शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हो या आकस्मिक संकट से जूझ रहा परिवार, हर जरूरतमंद तक समान संवेदनशीलता के साथ मदद पहुंचाई गई है।

आंकड़ों के मुताबिक विवेकाधीन कोष के अंतर्गत 50,000 रुपए जैसी छोटी सहायता से लेकर कई मामलों में तीन करोड़ रुपए से अधिक की बड़ी स्वीकृतियां प्रदान की गईं हैं। सरकार ने हर स्तर की जरूरत को प्राथमिकता दी है। चाहे वह व्यक्तिगत चिकित्सा सहायता हो, आकस्मिक दुर्घटना हो या अन्य आपात स्थिति। पिछले वित्तीय वर्ष में अयोध्या, अमेठी, बाराबंकी, आजमगढ़, बलिया और फिरोजाबाद जैसे जनपदों में कुछ बड़े केस के कारण सर्वाधिक धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं पार्टी की बात करें तो सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के जनप्रतिनिधियों ने भी समान रूप से इस योजना के तहत जरूरतमंदों की मदद करने में सरकार का सहयोग किया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी के इन दो जिलों के बीच नए रेल लाइन रूट पर कवायद शुरू, FSL को मिली मंजूरी

जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मजबूत कनेक्ट

इस योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसके तहत यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी स्तर पर राजनीतिक भेदभाव की गुंजाइश न रहे। सरकार का कहना है कि सभी दलों के जनप्रतिनिधियों, चाहे वे सत्तापक्ष से हों या विपक्ष से, उनके अनुरोधों पर समान गंभीरता और तत्परता से कार्रवाई की गई। इसमें विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।

जहां जरूरत, वहां सहायता

इस व्यवस्था में किसी प्रकार का पूर्व निर्धारित कोटा या सीमित आवंटन प्रणाली लागू नहीं की गई। सरकार ने बार-बार यह सुनिश्चित करने की बात कही कि सहायता का वितरण केवल औपचारिकताओं तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक जरूरत के अनुरूप हो। जहां जिस स्तर की आवश्यकता सामने आए, वहां उसी अनुपात में धनराशि स्वीकृत की जाए। जानकारों के मुताबिक इस नीति का सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, आकस्मिक दुर्घटनाओं या आपदा जैसी परिस्थितियों से प्रभावित परिवारों को न केवल समय पर, बल्कि पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सकी। इससे कई मामलों में इलाज में देरी नहीं हुई और परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में वास्तविक मदद मिली।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी में प्रिंसिपल और टीचर्स की भर्ती से जुड़ा बड़ा अपडेट, 3 सदस्यीय कमेटी बनी

त्वरित स्वीकृति से मिली राहत

सरकार का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया को केवल संवेदनशील ही नहीं, बल्कि तेज और प्रभावी भी बनाया गया है। आवेदन प्राप्त होने से लेकर उसकी स्वीकृति तक की प्रक्रिया को सरल और त्वरित रखा गया, जिससे जरूरतमंदों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़ा। इस तेज निर्णय प्रणाली के कारण हजारों मरीजों और संकटग्रस्त परिवारों को समय रहते सहायता मिल पाई। विशेष रूप से चिकित्सा सहायता के मामलों में यह व्यवस्था कई बार जीवनरक्षक साबित हुई, क्योंकि समय पर मिली आर्थिक मदद ने इलाज को संभव बनाया और गंभीर परिस्थितियों में लोगों को राहत पहुंचाई।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी में गर्मी में 5 घंटे ही खुलेंगे प्राइमरी स्कूल, नए सत्र में ये होगी टाइमिंग

इस तरह पा सकते हैं विवेकाधीन कोष से सहायता

मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष एक ऐसी विशेष वित्तीय व्यवस्था है, जिसके माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जरूरतमंद व्यक्तियों, संस्थाओं या आपात स्थितियों में त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। यह कोष मुख्यमंत्री के विवेक पर आधारित होता है, यानी किसे सहायता दी जाए, कितनी राशि दी जाए इसका निर्णय परिस्थितियों और जरूरत के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में तुरंत मदद पहुंचाना है, जहां नियमित सरकारी योजनाएं पर्याप्त या समय पर मदद नहीं दे पातीं। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आमतौर पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों (कैंसर, हार्ट सर्जरी, किडनी आदि), आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, दुर्घटना या आकस्मिक संकट से प्रभावित लोग और कुछ मामलों में शिक्षा या विशेष परिस्थितियों में सहायता प्रदान की जाती है। सहायता पाने के लिए आमतौर पर जनप्रतिनिधि (MLA/MP) के माध्यम से आवेदन या सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया जाता है। संबंधित दस्तावेज (जैसे मेडिकल रिपोर्ट, आय प्रमाण, अनुमानित खर्च आदि) के साथ आवेदन की जांच के बाद, जरूरत के अनुसार राशि स्वीकृत की जाती है।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।