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यूपी के बिल्डरों को अब बनाने ही होंगे 25% सस्ते घर, जानें सरकार की नई पॉलिसी

इससे पहले निजी डेवलपरों को अपनी परियोजना में 15 से 20 प्रतिशत तक ही EWS और LIG आवास आरक्षित करने होते थे। अभी तक जमीन बंधक रखने की अनिवार्यता सख्त नहीं थी। नई पॉलिसी में निजी डेवलपरों को परियोजना का 25 प्रतिशत आवास या न्यूनतम 100 आवास EWS श्रेणी के लिए अनिवार्य रूप से बनाना होगा।

Sun, 12 April 2026 12:23 PMAjay Singh मुख्य संवाददाता, कानपुर
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यूपी के बिल्डरों को अब बनाने ही होंगे 25% सस्ते घर, जानें सरकार की नई पॉलिसी

UP News: यूपी में कम बजट में अपना घर चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब निजी डेवलपरों और बिल्डरों को अब अपनी परियोजनाओं में 25 प्रतिशत किफायती आवास (ईडब्ल्यूएस) बनाने ही पड़ेंगे। ऐसा उनसे कराने के लिए नियम और शर्तें भी कड़ी कर दी गईं हैं। उन्हें अपनी 15 प्रतिशत जमीन संबंधित स्थानीय निकायों (केडीए, आवास विकास परिषद और यूपीसीडा) के पास बंधक रखनी होगी। उन्होंने ईडब्ल्यूएस आवास नहीं बनाए तो निकायों को अधिकार होगा कि बंधक रखी गई जमीन जब्त कर लें।

शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत ‘भागीदारी में किफायती आवास’ (पीएचपी) और ‘किफायती किराया आवास’ (एआरएच) के कार्यान्वयन के लिए नई पॉलिसी बनाई है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी की गई पॉलिसी केडीए और आवास विकास को भी भेजी गई है। इससे पहले निजी डेवलपरों को परियोजना में 15 से 20 प्रतिशत तक ही ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास आरक्षित करने होते थे। अभी तक जमीन बंधक रखने की अनिवार्यता सख्त नहीं थी। नई पॉलिसी में निजी डेवलपरों को परियोजना का 25 प्रतिशत आवास या न्यूनतम 100 आवास ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए अनिवार्य रूप से बनाना होगा।

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बदले में प्रोत्साहन और राहत

निजी डेवलपरों को इसके बदले प्रोत्साहन और राहत भी मुहैया कराई जाएगी। इन परियोजनाओं को भू-प्रयोग परिवर्तन शुल्क और मानचित्र शुल्क जैसे वैधानिक शुल्कों में छूट दी जाएगी। जो 15 प्रतिशत जमीन बंधक रखी जाएगी उसे लाभार्थियों को कब्जा मिलने के अनुपात में ही मुक्त किया जाएगा।

होगी निगरानी, समय सीमा तय

योजना में पारदर्शिता को हर परियोजना का रेरा में पंजीकरण अनिवार्य होगा। आवासों के निर्माण की निगरानी ‘भारत ऐप’ के माध्यम से जियो-टैगिंग द्वारा पांच चरणों में की जाएगी। चार मंजिला भवनों के निर्माण की समय सीमा 24 महीने और उससे अधिक ऊंचे भवनों के लिए 36 महीने निर्धारित हुई है।

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परियोजना की खास बातें

-कुल सब्सिडी: ₹2.50 लाख (₹1.50 लाख केंद्र और ₹1.00 लाख राज्य)

-पात्रता: शहरी क्षेत्र के ईडब्ल्यूएस, एलआईजी परिवार

-आवास का आकार: 30 से 35 वर्ग मीटर कारपेट एरिया

-प्रतिबंध: आवंटित आवास को पांच वर्षों तक बेचा नहीं जा सकेगा

-सुविधाएं: सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और हरित भवन मानक

क्या बोले टाउन प्लानर

कानपुर विकास प्राधिकरण के चीफ टाउन प्लानर मनोज कुमार ने बताया कि शासन ने नई पॉलिसी जारी की है। अब जो भी निजी डेवलपर अपनी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेंगे या तलपट मानचित्र स्वीकृत कराने आएंगे उनसे नई पॉलिसी के मुताबिक कार्य कराया जाएगा। 25% किफायती आवास बनाने होंगे। 15 % जमीन बंधक रखी जाएगी।

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