UP Banda Temperature Crosses 48 degrees with heatwave hottest in India due to tree Destructions क्यों तप रहा बांदा? पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों के चीरहरण ने गड़बड़ाया इको सिस्टम, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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क्यों तप रहा बांदा? पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों के चीरहरण ने गड़बड़ाया इको सिस्टम

यूपी के बांदा का तापमान देश भर सबसे अधिक है। बुधवार को 48 डिग्री पर पहुंच गया। पर्यावरण विद और सामाजिक कार्यकर्ता भी मान रहे हैं कि बांदा का इको सिस्टम गड़बड़ा गया है। जिले में खनिज संपदा होने के चलते यहां दिन रात केन समेत सभी नदियों में पोकलैंड गरज रही हैं।

Thu, 21 May 2026 07:26 AMSrishti Kunj संवाददाता, बांदा
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क्यों तप रहा बांदा? पेड़ों की अंधाधुंध कटान, पहाड़ों के चीरहरण ने गड़बड़ाया इको सिस्टम

यूपी के बांदा का तापमान देश भर सबसे अधिक है। बुधवार को 48 डिग्री पर पहुंच गया। पर्यावरण विद और सामाजिक कार्यकर्ता भी मान रहे हैं कि बांदा का इको सिस्टम गड़बड़ा गया है। जिले में खनिज संपदा होने के चलते यहां दिन रात केन समेत सभी नदियों में पोकलैंड गरज रही हैं। नदियों की जलधारा को रोककर किया जा रहा है।

वहीं, पहाड़ों को खोदकर छोड़ दिया गया है। केन बेतवा परियोजना में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए। पपरेंदा सुमेरपुर मार्ग को फोरलेन किया जा रहा है। काटे गए पेड़ों के बदले इतने पेड़ नहीं रोपे गए हैं। जिला खनिज अधिकारी राज रंजन का कहना है कि मानक के अनुसार खनन होता है। कहीं अवैध खनन पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है। बांदा का तापमान पहले भी इतना दर्ज हो चुका है।

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जेएनयू दिल्ली के हिमनद एवं प्राकृतिक आपदा विशेषज्ञ, डॉ. रुपेन्द्र सिंह ने कहा कि बांदा में बढ़ते तापमान का मुख्य कारण पर्यावरणीय असंतुलन है। नादियों में बालू खनन से प्राकृतिक संरचना नष्ट हो रही है, भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है। वहीं, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से हरित आवरण कम होता जा रहा है। इन दोनों गतिविधियों के प्रभाव से बांदा में गर्मी की तीव्रता बढ़ी है, वातावरण में नमीं कम हुई है।

बांदा, प्रभागीय वनाधिकारी, अरविंद ने कहा कि जिले में मौजूदा में 101.3 किमी. में ओपेन फारेस्ट है। तापमान बढ़ने के कई कारण है। मौजूदा साल में पौधरोपण अभियान की तैयारी चल रही है। पद्मश्री, उमाशंकर पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड के बांदा में बढ़ता तापमान चिंतनीय है। इसका मुख्य कारण है कि यहां का इकोसिस्टम गड़बड़ा रहा है। नदियां वन जल सभी का एक दूसरे जुड़ाव है। इस पर नीति नियंताओं को विचार करने की जरूरत है।

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एक्सप्रेस-वे के लिए काटे गए थे 1.90 लाख पेड़

बुंदेलखंड में विकास योजनाओं का खामियाजा हरे पेड़ों को भुगतना पड़ा था। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे निर्माण में 1.90 लाख पेड़-पौधे काटे गए हैं। इनमें कई पेड़ प्राचीन और विरासत वृक्ष की श्रेणी के हैं। बांदा के कनवारा गांव के पास एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए लगभग 200 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष काट दिया था। वहीं वन विभाग का पौधरोपण कागजी ज्यादा रहता है। इस साल भी 64 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। बांदा का वन क्षेत्र महज तीन प्रतिशत है। जबकि इसे 33 फीसदी होना चाहिए।

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जिलाधिकारी बांदा, अमित आसेरी ने कहा कि जनपद वासियों से अपील है कि बिना काम के घर से न निकलें। जरूरी काम से निकलना है सूती और हल्के आरामदायक कपड़े पहनें। यात्रा के दौरान प्यास न लगे फिर भी पानी पानी पीते रहें। अगर हीटवेव की आशंका हो तो तुरंत अस्पताल में उपचार किया जाएगा। हीटवेव को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

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