मिशन-2027: भाजपा के लिए क्यों चुनौती बना पश्चिमी यूपी का यह इलाका? योगी पर टिकीं उम्मीदें
सीएम योगी आज सहारनपुर दौरे पर हैं। पिछल कुछ समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहारनपुर मंडल में कई दौरे कर चुके हैं। यह मंडल अगले विधानसभा चुनाव की दृष्टि से भाजपा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय रह गया है। ऐसे में सभी पार्टियों की नजर चुनाव पर टिक गई हैं। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जिम्मेदारियां बांटी जा रही हैं। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी के लिए भी यूपी के कुछ इलाके बेहद चुनौती पूर्ण हैं। ऐसा ही एक इलाका है पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर मंडल।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मंडल की मिश्रित सामाजिक संरचना और जातीय रूप से बिखरे मतदाता समीकरणों के कारण यहां किसी एक जाति विशेष के प्रभावशाली नेता के लिए व्यापक राजनीतिक आधार तैयार करना आसान नहीं है। ऐसे में भाजपा की चुनावी रणनीति काफी हद तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता पर निर्भर दिखाई देती है।
सीएम योगी का लगातार दौरा
हाल के महीनों में सहारनपुर मंडल में सीएम योगी का लगातार दौरा करना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार को बिजनौर में कार्यक्रम के बाद उनका सहारनपुर स्थित मां शाकुम्भरी देवी सिद्धपीठ क्षेत्र का दौरा प्रस्तावित है। दो दिन पहले यहां आई बाढ़ और उससे हुए नुकसान के मद्देनजर यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
बहुजातीय समर्थन जुटाना जरूरी
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार राघव का कहना है कि सहारनपुर मंडल की जनसांख्यिकीय संरचना ऐसी है जहां किसी एक जाति का किसी बड़े भूभाग पर निर्णायक वर्चस्व नहीं है। विभिन्न जातियों के छोटे-छोटे समूह अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं। यही कारण है कि यहां चुनावी सफलता के लिए बहुजातीय समर्थन जुटाना आवश्यक हो जाता है।
मुस्लिम और दलित ज्यादा प्रभावशाली
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जबकि दलित मतदाता भी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबलों में सामाजिक गठबंधनों का महत्व बढ़ जाता है। भाजपा के लिए परंपरागत समर्थक वर्गों के साथ अन्य सामाजिक समूहों में भी स्वीकार्यता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव ने दिया झटका
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों ने भी इस क्षेत्र में भाजपा की चुनौतियों को उभारा था। सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीटों पर भाजपा की हार ने संकेत दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला पहले की तुलना में अधिक कड़ा हो चुका है।
सभी वर्गों में संतुलन ही चुनौती
वर्तमान विधानसभा प्रतिनिधित्व की बात करें तो सहारनपुर जिले में भाजपा के चार विधायक हैं, जबकि कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के सामने केवल चुनावी गणित ही नहीं बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में सहारनपुर मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। क्षेत्र की सामाजिक विविधता, स्थानीय मुद्दे, नेतृत्व की स्वीकार्यता और राजनीतिक गठबंधन चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे में सभी प्रमुख दलों के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।




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