यूपी के इन शिक्षकों को मूल तैनाती पर जाना होगा वापस, नया आदेश जारी
डिग्री कॉलेजों में लगातार छात्रों की कम हो रही संख्या के चलते अब उच्च शिक्षा विभाग ने अपने निर्णय को वापस ले लिया है। सभी संबद्ध किए गए शिक्षकों को अपनी मूल कॉलेज वापस लौटना होगा। यही नहीं नए शैक्षिक सत्र से छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए प्राचार्य और शिक्षकों को नए दाखिले भी कराने होंगे।

UP News: उत्तर प्रदेश के राजकीय डिग्री कॉलेजों के वह शिक्षक जिन्हें दूसरे कॉलेजों में संबद्ध किया गया था, अब वह अपने मूल कॉलेज वापस किए जाएंगे । बड़ी संख्या में शिक्षकों को बड़े शहरों के डिग्री कॉलेजों से संबद्ध कर दिया गया था, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब उच्च शिक्षा विभाग के इस फैसले से छोटे जिलों के डिग्री कॉलेजों में ढंग से पढ़ाई हो सकेगी। अभी शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
लखीमपुर खीरी और सोनभद्र जैसे जिलों के डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को बड़े शहरों के कॉलेजों में संबद्ध कर दिया गया था। डिग्री कॉलेजों में लगातार छात्रों की कम हो रही संख्या के चलते अब उच्च शिक्षा विभाग ने अपने निर्णय को वापस ले लिया है । अब सभी संबद्ध किए गए शिक्षकों को अपनी मूल कॉलेज वापस लौटना होगा। यही नहीं नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य और शिक्षकों को इंटर कॉलेजों से संपर्क कर नए दाखिले भी कराने होंगे।
पिछले साल बेसिक और माध्यमिक के शिक्षक मूल तैनाती पर किए गए थे वापस
इसके पहले पिछले साल अक्टूबर में यूपी में बेसिक और माध्यमिक शिक्षक मूल तैनाती पर वापस किए गए थे। योगी सरकार ने नियमों के खिलाफ शिक्षकों और कर्मचारियों को मूल पद से इतर संबद्धता को समाप्त करते हुए मूल पदों पर भेजने का निर्देश दिया था। तब अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में शासनादेश जारी करते हुए निर्देश भेजा था। इसमें कहा गया था कि संबंद्ध शिक्षकों और कर्मचारियों को तुरंत उनके मूल पदों पर भेजा जाए।
अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया था कि शासन की इजाजत के बिना अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा जिन शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती से इतर कहीं संबद्ध किया गया है उनका संबद्धीकरण आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर मूल स्थान पर वापस भेजा जाए। इसके साथ ही चेतावनी देते हुए यह भी कहा गया था कि भविष्य में शासन की इजाजत के बिना किसी भी शिक्षक, अधिकारी या कर्मचारी को ऐसे स्थान पर संबद्ध न किया जाए जहां उनकी मूल तैनाती न हो। कहा गया था कि निर्देशों का तत्काल पालन किया जाए।
भ्रष्टाचार पर भी लगेगी रोक
यूपी में बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के करीब 4500 शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी अपने मूल विद्यालयों से इतर कार्यालयों और अलग-अलग संस्थानों में संबद्ध थे। जब उनकी संबद्धता रद्द की गई तो कहा गया कि शिक्षकों-कर्मचारियों का संबद्धीकरण खत्म होने से भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।




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