यूपी: बिजली विभाग के एक्सईएन की गिरफ्तारी का आदेश, वारंट जारी; जानें मामला
सिविल बार एसोसिएशन का विद्युत कनेक्शन कई महीनों से कटा हुआ था, जबकि 21 करोड़ रुपये से अधिक बकाया होने के बावजूद अन्य सरकारी विभागों की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की गई। एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष ने आयोग में मुकदमा दायर किया। बार के महामंत्री का आरोप है कि भारी बकाया दर्शाते हुए कनेक्शन काट दिया गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के बस्ती में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा ने आदेश का पालन न करने पर विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता प्रथम शुभम पांडेय की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया है। आयोग ने गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक से अनुपालन सुनिश्चित कराने की अपेक्षा की है।
सिविल बार एसोसिएशन का विद्युत कनेक्शन कई महीनों से कटा हुआ था, जबकि 21 करोड़ रुपये से अधिक बकाया होने के बावजूद अन्य सरकारी विभागों की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की गई थी। एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष रमाशंकर पाण्डेय ने आयोग में मुकदमा दायर किया। बार के महामंत्री राजेश सिंह का आरोप है कि विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के दो किलोवाट से बढ़ाकर आठ किलोवाट भार क्षमता कर दी और भारी बकाया दर्शाते हुए कनेक्शन काट दिया।
बार एसोसिएशन की ओर से 1.93 लाख रुपये जमा करने के बाद भी विभाग ने विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की। बिजली के अभाव में अधिवक्ताओं का कार्य प्रभावित होता रहा। वर्तमान अध्यक्ष ने तत्काल कनेक्शन जोड़ने का अनुरोध किया था।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा एवं सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने 15 अप्रैल को अंतरिम आदेश जारी कर तीन दिन में बिजली कनेक्शन बहाल करने का निर्देश दिया था। साथ ही विभाग से अधिभार बढ़ाने संबंधी नोटिस की प्रति भी मांगी गई थी। आदेश का पालन न होने पर आयोग ने विभाग को एक और अवसर देते हुए लाइन जोड़ने का निर्देश दिया, लेकिन इसके बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई। इसके बाद आयोग ने अधिशासी अभियंता को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया।
बताया गया कि अभियंता न्यायालय परिसर में शपथ पत्र तैयार कराने पहुंचे, लेकिन अदालत में उपस्थित नहीं हुए और न ही अधिभार बढ़ाने से संबंधित नोटिस की प्रति प्रस्तुत की। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। हालांकि, इसका कोई अभिलेखीय साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अधिशासी अभियंता के कार्य व्यवहार से स्पष्ट है कि उन्हें न्यायालय के आदेश का पालन करने में रुचि नहीं है।




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