Hindustan Special: यूपी का एक ऐसा गांव, जहां हर घर में रेलकर्मी, हेल्पर से लेकर ट्रेन मैनेजर तक कार्यरत
बरेली जिले के मीरगंज तहसील क्षेत्र का थानपुर गांव अपनी एक अनोखी और प्रेरक पहचान के कारण चर्चा में है। धनेटा रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह गांव केवल अपने भौगोलिक स्थान के लिए नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए भी जाना जाता है।

Bareilly News: बरेली जिले के मीरगंज तहसील क्षेत्र का थानपुर गांव अपनी एक अनोखी और प्रेरक पहचान के कारण चर्चा में है। धनेटा रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह गांव केवल अपने भौगोलिक स्थान के लिए नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए भी जाना जाता है। फतेहगंज पश्चिमी कस्बे से कुछ ही दूरी पर बसे इस गांव में लगभग हर घर से कोई न कोई सदस्य रेलवे विभाग में कार्यरत है।
करीब 1200 मतदाताओं की आबादी वाले इस गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां लगभग 90 प्रतिशत लोग रेलवे में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि शेष लगभग 10 प्रतिशत लोग शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हैं। यह स्थिति थानपुर को जिले ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक ‘सरकारी सेवा गांव’ के रूप में पहचान दिलाती है। गांव के लोग रेलवे के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। यहां हेल्पर से लेकर स्टेशन सुपरिंटेंडेंट (एसएस), डिप्टी एसएस, ट्रेन मैनेजर तथा रेलवे इंजीनियरिंग और ऑपरेटिंग विभागों तक में ग्रामीण अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
दशकों पहले हुई थी इस परंपरा की शुरुआत
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत कई दशकों पहले हुई थी, जब कुछ परिवारों को रेलवे में नौकरी मिली। इसके बाद मृतक आश्रित कोटे और वीआरएस के बाद परिवार के अन्य सदस्यों को अवसर मिलता गया। धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और आज स्थिति यह है कि गांव में 518 लोग सीधे रेलवे में कार्यरत हैं। यही कारण है कि यहां के युवाओं का रुझान भी लगातार रेलवे की तैयारी की ओर बना हुआ है। गांव में शिक्षा का स्तर भी संतुलित और मजबूत है। लगभग 10 प्रतिशत लोग शिक्षक के रूप में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्कूलों में कार्यरत हैं। ये शिक्षक 40 से 50 किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे गांव की शैक्षिक पहचान भी मजबूत होती है।
नौकरी के साथ कृषि को भी समान महत्व देते हैं लोग
थानपुर गांव की एक और खास बात यह है कि यहां के लोग केवल नौकरी पर ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि कृषि को भी समान महत्व देते हैं। ग्रामीण पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और प्राकृतिक खेती को भी अपनाए हुए हैं। औषधीय फसलों की खेती, विशेषकर सतावर जैसी फसलें यहां बड़े स्तर पर की जाती हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जो औषधीय उत्पादों की सफाई और प्रसंस्करण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सरकारी नौकरी और कृषि का यह संतुलन ही थानपुर को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर गांव बनाता है। यहां के युवा जहां एक ओर रेलवे की नौकरी के सपने को साकार करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की परंपरा और संसाधनों को भी आगे बढ़ा रहे हैं।




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