SIT to probe sacked crorepati Lekhpal of UP, orders Allahabad High Court यूपी के बर्खास्त करोड़पति लेखपाल की जांच एसआईटी करेगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी के बर्खास्त करोड़पति लेखपाल की जांच एसआईटी करेगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

यूपी के कानपुर में  बर्खास्त लेखपाल आलोक दुबे के मामले की जांच एसआईटी से कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एडीजी एसटीएफ के नेतृत्व में एसआईटी गठित करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

Fri, 24 April 2026 09:22 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी के बर्खास्त करोड़पति लेखपाल की जांच एसआईटी करेगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्त लेखपाल आलोक दुबे के मामले की जांच एसआईटी से कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने एडीजी एसटीएफ के नेतृत्व में एसआईटी गठित करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश मिलते ही एसटीएफ ने कार्रवाई शुरू कर दी है और बर्खास्त लेखपाल की संपत्तियों का ब्योरा व उनके मूल्यांकन से संबंधित विवरण जिला प्रशासन से तलब किया है।

अवैध तरीके से जमीन की खरीद-फरोख्त और एक ही दिन संपत्ति की वरासत व दाखिल-खारिज कराने के मामले में पूर्व लेखपाल और कानूनगो आलोक दुबे दोषी पाए गए थे। पहले उन्हें कानूनगो पद पर रहते हुए निलंबित किया गया, फिर डिमोट कर लेखपाल बना दिया गया। उनके खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। जांच में आलोक दुबे के पास 41 संपत्तियां होने का खुलासा हुआ। कानूनगो से लेखपाल बनाए जाने के डिमोशन के खिलाफ उन्होंने कमिश्नर कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां अपील खारिज करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के खिलाफ आलोक दुबे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया और आदेश को गलत व अवैध बताया। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एडीजी एसटीएफ के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच शुरू करते हुए एसटीएफ ने लेखपाल की संपत्तियों का ब्योरा और उनके मूल्यांकन से संबंधित रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही आरोप है कि लेखपाल ने रिंग रोड परियोजना के मुआवजे का दुरुपयोग कर लाखों रुपये का लाभ भी लिया।

29 साल तक सदर तहसील में रहा

आलोक दुबे कानपुर के दयानंद विहार का निवासी है। वर्ष 1993 में उसकी नियुक्ति सदर तहसील में लेखपाल पद पर हुई थी। इसके बाद उसकी तैनाती इटावा में रही, लेकिन वर्ष 1995 में उसका तबादला फिर कानपुर हो गया। आरोप है कि इसके बाद वह लगातार कानपुर तहसील में ही कार्यरत रहा और अधिकारियों से साठगांठ के चलते करीब 29 साल तक वहीं जमे रहा। बीच-बीच में तबादले के आदेश हुए, लेकिन हर बार वह प्रबंधन कर वापस यहीं तैनात हो जाता था। वर्ष 2023 में उसका प्रमोशन होकर वह कानूनगो बन गया। वहीं, वर्ष 2022 से 2025 तक वह तहसील लेखपाल संघ का अध्यक्ष भी रहा।

41 संपत्तियों का हो चुका खुलासा

भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की जांच में आलोक दुबे के पास 41 संपत्तियां होने का खुलासा हो चुका है। इसकी रिपोर्ट एसआईटी (स्टाम्प) की ओर से दी जा चुकी है। उनकी पत्नी और बच्चों के नाम पर भी कई संपत्तियां दर्ज हैं। इस हेराफेरी में आलोक दुबे अकेले नहीं थे, बल्कि लेखपाल अरुणा द्विवेदी का नाम भी सामने आया है। कई संपत्तियों में अरुणा उनकी हिस्सेदार बताई गई हैं। दोनों ने बीते दो वर्षों में अलग-अलग स्थानों पर करीब 8.62 हेक्टेयर जमीन खरीदी है।

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एडीएम फाइनेंस विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि लेखपाल मामले की जांच अब एसआईटी करेगी। एडीजी एसटीएफ ने लेखपाल आलोक दुबे की संपत्ति का ब्योरा व उसकी संपत्ति की मूल्यांकन रिपोर्ट मांगी है। जिसे जिला प्रशासन जल्द उपलब्ध करा देगा। मूल्यांकन रिपोर्ट एआईजी स्टाम्प से मांगी गई हैं।

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