इलाज कराने की थी हसरत, पर गरीबी बनी रुकावट; बीमार युवती ने की मां-भाई की हत्या
मुरादाबाद में एक बीमार युवती ने अपनी मां और भाई पर सरिये से वार कर मार डाला। दोनों की जान लेने के बाद आरोपी युवती जिस हाल में घर से बाहर निकली, उसे देखकर गांव वाले कांप गए। युवती के हाथ में खून से सना लोहे का सरिया और कपड़ों पर खून बिखरा था।

यूपी के मुरादाबाद के कांठ थाना क्षेत्र के भैसली जमालपुर गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया। जब एक बीमार युवती ने अपनी मां और भाई पर सरिये से वार कर मार डाला। दोनों की जान लेने के बाद आरोपी युवती जिस हाल में घर से बाहर निकली, उसे देखकर गांव वाले कांप गए। युवती के हाथ में खून से सना लोहे का सरिया और कपड़ों पर खून बिखरा था। वह बदहवास होकर गांव की गलियों में भागने लगी।
उसे इस हाल में देखकर रास्ते में खड़े लोगों को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है। जैसे ही लोगों की नजर उसके खून से सने सरिये पर पड़ी, गांव में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। महिलाओं ने बच्चों को घरों के अंदर खींच लिया और दरवाजे बंद कर लिए। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि वह इतनी गुस्से में थी कि किसी की भी उसके पास जाने की हिम्मत नहीं हुई। पूरे गांव में शोर मच गया, 'वो सबको मार देगी।' इसी खौफ के बीच पुलिस गांव पहुंची। पुलिस को देखकर भी युवती शांत नहीं हुई, लेकिन घेराबंदी करके उसे पकड़ लिया गया। जब पुलिस उसे लेकर गई, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली और अपने घरों के दरवाजे खोले।
पांच दिनों में हो गई हमलावर
आरोपी युवती पिछले पांच दिनों से इतनी आक्रामक हो चुकी थी कि वह हर किसी पर हमला करने के लिए दौड़ रही थी। परिजनों ने उसे ठीक करने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन जब वह काबू से बाहर होने लगी तो उसे मजबूरी में रस्सी से बांधकर रखना पड़ा। बड़े भाई राजीव के मुताबिक बहन का इलाज दो साल से चल रहा था, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। बुधवार को भी परिवार के बाकी लोग गेहूं काटने खेत पर चले गए थे लेकिन मां मुन्नी देवी और छोटा भाई अर्जुन सिर्फ इसलिए घर रुक गए ताकि बीमार बहन की देखभाल कर सकें और उसे खाना खिला सकें। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वह अपने हाथों की रस्सी खोल लेगी। शाम को जैसे ही उसके हाथ खुले, उसने सामने मौजूद मां और भाई पर ही हमला बोल दिया।
इलाज कराने की थी हसरत, गरीबी बनी रुकावट
राजीव के मुताबिक, पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसे किसी बड़े अस्पताल या मानसिक केंद्र में भर्ती कराया जा सके। घर पर ही बांधकर उसका ख्याल रखा जा रहा था, ताकि वह खुद को या किसी और को चोट न पहुंचाए। लेकिन वही सावधानी इस परिवार के दो सदस्यों के लिए मौत का कारण बन गई।




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