sarkari daftar aadesh bechane ki dukan nahi anticipatory bail plea of female bsa shalini srivastava rejected सरकारी दफ्तर आदेश बेचने की दुकान नहीं, यूपी की इस फरार महिला BSA की अग्रिम जमानत याचिका रद्द, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सरकारी दफ्तर आदेश बेचने की दुकान नहीं, यूपी की इस फरार महिला BSA की अग्रिम जमानत याचिका रद्द

बीएसए की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं। साक्ष्य, सुसाइड नोट, गवाह का बयान, वीडियो-ऑडियो क्लिप सभी अभियोजन पक्ष की कहानी की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है।

Sat, 30 May 2026 03:40 PMAjay Singh विधि संवाददाता, प्रयागराज
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सरकारी दफ्तर आदेश बेचने की दुकान नहीं,  यूपी की इस फरार महिला BSA की अग्रिम जमानत याचिका रद्द

UP News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने दिया है। गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाने में इस साल 22 फरवरी को गुड़िया सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि बीएसए और कार्यालय लिपिक संजीव सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के बदले तीन शिक्षकों कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये यानी कुल 48 लाख रुपये रिश्वत के तौर पर मांगे। कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी दफ्तर को आदेश बेचने की दुकान नहीं बनने दिया जा सकता।

तीनों शिक्षकों ने यह रकम चुकाई, जिसके लिए उन्हें गहने गिरवी रखने पड़े और कर्ज लेना पड़ा। शिकायतकर्ता के पति कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मंदरसन गौरी बाजार में 2016 से सहायक अध्यापक थे। 20 फरवरी 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को भी बीएसए कार्यालय बुलाकर अपमानित और प्रताड़ित किया गया तथा और रकम की मांग की गई। उसी रात (20-21 फरवरी) उन्होंने पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

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मृतक की जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने बीएसए और क्लर्क संजीव सिंह को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया और सीबीआई जांच की मांग की। इसके अलावा पुलिस को मृतक के वीडियो और ऑडियो क्लिप भी मिले, जिनमें उन्होंने रिश्वत लिए जाने की बात खुद कही है। सीसीटीवी फुटेज में भी कृष्ण मोहन सिंह का 20 फरवरी को बीएसए दफ्तर जाना दर्ज है।

कोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और साक्ष्य सुसाइड नोट, गवाह ओमकार सिंह का बयान, वीडियो-ऑडियो क्लिप सभी अभियोजन पक्ष की कहानी की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी दफ्तर को आदेश बेचने की दुकान नहीं बनने दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जा सकती है। बीएसए शालिनी श्रीवास्तव पहले से निलंबित हैं।

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा कहा है,आरोप बहुत गंभीर है और अधिकारी गैरकानूनी रिश्वत लेने में शामिल हैं। सरकारी कार्यालय को अधिकारियों द्वारा आदेश बेचने की खुली दुकान नहीं बनने दिया जा सकता। शिकायतकर्ता के पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली।

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