Minister Vijay Lakshmi Gautam Criticizes Opposition for Betraying Women s Rights in Parliament कांग्रेस और सहयोगी दल महिला आरक्षण का कर रहे विरोध, Santkabir-nagar Hindi News - Hindustan
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कांग्रेस और सहयोगी दल महिला आरक्षण का कर रहे विरोध

Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर, निज संवाददाता। जनपद की प्रभारी मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम शुक्रवार को जिले में

Sat, 25 April 2026 01:45 AMNewswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
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कांग्रेस और सहयोगी दल महिला आरक्षण का कर रहे विरोध

संतकबीरनगर, निज संवाददाता। जनपद की प्रभारी मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम शुक्रवार को जिले में पहुंची। उन्होंने पार्टी कार्याकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए जरूरी दिशा निर्देश दिए। उन्होंने पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपने महिला-विरोधी मानसिकता को पूरी तरह उजागर कर दिया है।उन्होंने कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है।

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जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण और ध्यान भटकाने का एक तकनीकी बहाना मात्र है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लडाई लड़ेगी। यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इसके विरोध से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए। पूरे देश ने संसद में जो शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी आचरण विपक्षी गठबंधन का देखा, उसकी भाजपा कड़ी निंदा करती है। इन दलों ने केवल संवैधानिक संशोधन या परिसीमन से जुड़े विधेयकों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारत की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के साथ विश्वासघात किया है।प्रभारी मंत्री ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है। ये दल राजनीतिक बहानों और देरी की दीवारें खड़ी कर देते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा दशकों तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने की साजिश की है। यह साजिश एक बार फिर उजागर हो गई। ये दल लोकतंत्र के रक्षक होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टिकरण के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, तब इन विपक्षी दलों ने चुनावों के दबाव में उसका समर्थन किया, लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तो उनकी महिला-विरोधी सोच खुलकर सामने आ गई। देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं वे सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं और निर्णय ले रही हैं और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ऐसे में इस ऐतिहासिक अवसर को टालना केवल विधायी देरी नहीं, बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति का गला घोंटना है और इसके जिम्मेदार लोगों को हर चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

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