संभल हिंसा केस: अनुज चौधरी की गवाही को लेकर तीखी बहस, विवादित टिप्पणी से गरमाया माहौल
संभल हिंसा से जुड़े मुकदमे की सुनवाई के दौरान मंगलवार को जनपद न्यायालय चन्दौसी में सरकारी और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच जोरदार बहस हुई। विवाद तत्कालीन सीओ (वर्तमान एएसपी) अनुज चौधरी की गवाही को लेकर हुआ।

संभल में जनपद न्यायालय में मंगलवार को संभल हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मुकदमे की सुनवाई के दौरान माहौल गरमा गया। सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी की गवाही को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा अधिकारी पर की गई एक विवादित टिप्पणी पर सरकारी वकील ने कड़ा ऐतराज जताया। न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह ने दोनों पक्षों को न्यायालय की गरिमा बनाए रखने की नसीहत देते हुए अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है।
मामला सरकार बनाम मुल्ला अफरोज आदि (मुकदमा अपराध संख्या 340/2024) से संबंधित है। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित और बचाव पक्ष के अधिवक्ता आसिफ अख्तर के बीच उस समय बहस तेज हो गई जब अधिवक्ता आसिफ अख्तर ने पूर्व सीओ और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी कर दी। इस पर शासकीय अधिवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि अनुज चौधरी ने संभल को दंगों से बचाने का कार्य किया है, जबकि कुछ अन्य लोग शहर की शांति बिगाड़ने के जिम्मेदार रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बहस को देख न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिवक्ताओं को निर्देश दिए कि व्यक्तिगत टिप्पणियों से न्यायालय की कार्यवाही को प्रभावित न किया जाए।
सुरक्षा कारणों से अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही
दरअसल, विवाद एएसपी अनुज चौधरी की गवाही के तरीके को लेकर था। बचाव पक्ष उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में बुलाने की मांग कर रहा था, जबकि सरकारी पक्ष ने सुरक्षा कारणों और शासन की गाइडलाइन का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) से गवाही कराने की अपील की थी। शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संभल में तैनाती के दौरान अधिकारी को धमकियां और अपशब्द कहे गए थे। न्यायालय ने सरकारी पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए वीसी के माध्यम से गवाही कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।




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