राप्ती में दोस्तों संग नहाने के दौरान हादसा; रेजिडेंट डॉक्टर और MBBS छात्र की डूबने से मौत
सिद्धार्थनगर में दोस्तों के साथ राप्ती में नहाने के दौरान हादसा हो गया। जब रेजिडेंट डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र की डूबने से मौत हो गई। गोताखारों ने करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर सत्यम और छात्र सचिन के शवों को ढूंढकर बाहर निकाला।

सिद्धार्थनगर जिले में सोमवार को नदी में नहाने गए मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल छात्र समेत तीन लोगों की डूबकर मौत हो गई। रेजिडेंट डॉक्टर और एमबीबीएस के तीन छात्र बूढ़ी राप्ती नदी में नहाने गए थे। इनमें से दो छात्रों की जान बच गई। वहीं जिले के पथरा बाजार क्षेत्र में राप्ती नदी में दोस्तों संग नहाते वक्त पानी में समा गया। रेजिडेंट डॉक्टर बस्ती के, जबकि मेडिकल छात्र राजस्थान का रहने वाला था। मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर सत्यम नायक (26) पुत्र संतराम नायक निवासी गायघाट, कलवारी, जिला बस्ती, एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र सचिन महावर (22) पुत्र अज्ञात निवासी सवाई माधव सिंह, राजस्थान, विनीत (22) पुत्र वीरेंद्र सिंह निवासी नदुबई, भरतपुर, राजस्थान और एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के ही छात्र नीतेश (22) पुत्र अज्ञात निवासी झुनझुन, राजस्थान सोमवार को नदी में नहाने गए थे।
दोस्तों के साथ नहाने के दौरान हादसा
जोगिया कोतवाली के जोगिया कस्बा के पास योगमाया मंदिर के किनारे से बहने वाली बूढ़ी राप्ती नदी में चारों ने छलांग लगाई। उनमें से रेजिडेंट डॉक्टर सत्यम नायक और सचिन महावर गहरे पानी में जाकर लापता हो गए। वहीं नीतेश को विनीत ने खींच कर बाहर निकाल लिया। एसडीएम सदर कल्याण सिंह मौर्य, सीओ बांसी शुबेंदु सिंह, जोगिया कोतवाली प्रभारी अभय सिंह फोर्स के साथ पहुंचे।
डेढ़ घंटे बाद गोताखोरों ने निकाले 2 शव
गोताखारों ने करीब डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर सत्यम और छात्र सचिन के शवों को ढूंढकर बाहर निकाला। थानाध्यक्ष अभय सिंह ने बताया कि शवों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। उसके बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी। मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है।
18 साल का युवक नदी में डूबा
वहीं दूसरी घटना में तुरकौलिया तिवारी गांव निवासी किशन कुमार (18 ) पुत्र दिनेश चंद्र गुप्ता गांव के ही चार दोस्तों के साथ राप्ती नदी के पेंदा गांव के तट पर नहाने गया था। किशन गहरे पानी में चला गया। उसके दोस्त कुछ समझ पाते कि वह नदी में समा गया। साथियों ने बाहर निकलकर मदद की गुहार लगाई। घंटों मशक्कत के बाद गोताखोरों की मदद से किशोर की तलाश हो पाई।
सांसें चलने के संदेह पर परिजन पीएचसी बेंवा ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि मृतक के चाचा बद्री प्रसाद ने तहरीर दी है। परिजन लाश का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाह रहे थे। इसलिए शव उनके सुपुर्द कर दिया गया। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है।




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