Reference Court Lacks Remand Powers Land Acquisition Cases High Court Sets Aside Order जमीन अधिग्रहण मामले में रेफरेंस कोर्ट को नहीं है रिमांड का अधिकार, हाईकोर्ट ने रद्द किया फैसला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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जमीन अधिग्रहण मामले में रेफरेंस कोर्ट को नहीं है रिमांड का अधिकार, हाईकोर्ट ने रद्द किया फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि रेफरेंस कोर्ट (संदर्भ न्यायालय) को कलेक्टर के अवॉर्ड को निरस्त कर मामले को दोबारा कलेक्टर के पास भेजने (रिमांड) का अधिकार नहीं है।

Fri, 10 April 2026 09:58 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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जमीन अधिग्रहण मामले में रेफरेंस कोर्ट को नहीं है रिमांड का अधिकार, हाईकोर्ट ने रद्द किया फैसला

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि रेफरेंस कोर्ट (संदर्भ न्यायालय) को कलेक्टर के अवॉर्ड को निरस्त कर मामले को दोबारा कलेक्टर के पास भेजने (रिमांड) का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया। यह मामला सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील स्थित ग्राम तेनुआ ग्रांट में मैनाराजवाहा के निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि से जुड़ा है। वर्ष 2010 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और कलेक्टर ने 13 नवंबर 2019 को लगभग 1.14 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था।

भूमि मालिकों ने इस मुआवजे को चुनौती देते हुए रेफरेंस कोर्ट में आवेदन किया। रेफरेंस कोर्ट ने 25 मार्च 2023 के अपने आदेश में कलेक्टर के अवॉर्ड को रद्द करते हुए मामला पुनः कलेक्टर को भेज दिया, यह कहते हुए कि मुआवजा 2013 के नए कानून के तहत तय होना चाहिए था। हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 और 2013 दोनों ही कानूनों के तहत रेफरेंस कोर्ट एक मूल न्यायालय की तरह कार्य करता है, न कि अपीलीय न्यायालय की तरह। इसलिए उसे मामले को वापस कलेक्टर के पास भेजने का अधिकार नहीं है।

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रेफरेंस कोर्ट कर सकता है दो काम

अदालत ने स्पष्ट किया कि रेफरेंस कोर्ट केवल दो काम कर सकता है। पहला वह कलेक्टर के अवॉर्ड को बरकरार रख सकता है या मुआवजे में वृद्धि कर सकता है। लेकिन अवॉर्ड को निरस्त कर दोबारा विचार के लिए कलेक्टर को भेजना कानून के विपरीत है। हाईकोर्ट ने रेफरेंस कोर्ट के 25 मार्च 2023 के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को फिर से उसी रेफरेंस कोर्ट में बहाल कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि वह छह महीने के भीतर मामले का निस्तारण करे और अनावश्यक स्थगन न दिया जाए।

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जीआईसी प्रवक्ता भर्ती में आयुसीमा में छूट पर निर्णय लेने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को जीआईसी प्रवक्ता पदों पर आई भर्ती की आयुसीमा में छूट को लेकर याचियों को परीक्षा में सम्मिलित करने पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने अश्वनी कुमार व दस अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता संजय कुमार यादव को सुनकर दिया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 12 अगस्त 2025 को प्रवक्ता (राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज) के 1471 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया, जिसमें अधिकतम आयुसीमा में कोई छूट प्रदान नहीं की गई थी।

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एडवोकेट संजय यादव ने दलील दी कि वर्तमान प्रवक्ता (जीआईसी) भर्ती में राज्य सरकार ने अधिकतम आयुसीमा में कोई छूट प्रदान नहीं की है जबकि उत्तर प्रदेश शासन ने अन्य भर्तियों में उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली 1992 के नियम 3 के आलोक में निर्धारित आयु सीमा में सभी वर्गों के लिए अपवाद स्वरूप एक बार के लिए आयु में शिथिलीकरण प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके बाद भी प्रवक्ता भर्ती में अधिकतम आयु सीमा में कोई छूट प्रदान नहीं की गई है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचियों को तीन दिन के भीतर इस आदेश की प्रमाणित कॉपी और याचिका की स्व-सत्यापित कॉपी के साथ प्रधान सचिव (उच्च माध्यमिक शिक्षा) के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार और लोक सेवा आयोग को याचियों को परीक्षा में सम्मिलित करने पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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