ग्राम न्यायालय को भी फैमिली कोर्ट की तरह गुजारा भत्ता पर सुनवाई का अधिकार, हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि ग्राम न्यायालय को भी फैमिली कोर्ट की तरह पत्नी, बच्चों व अभिभावकों को गुजारा भत्ता दिलाने के मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार है।

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि ग्राम न्यायालय को भी फैमिली कोर्ट की तरह पत्नी, बच्चों व अभिभावकों को गुजारा भत्ता दिलाने के मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार है। दोनों में से किसी अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल की जा सकती है। इसी के साथ कोर्ट ने मेरठ में ग्राम न्यायालय करहल के न्यायाधिकारी को याची की आदेश निष्पादन अर्जी यथाशीघ्र छह महीने में निस्तारित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने दामिनी की ओर से उसके अधिवक्ता संजय कुमार यादव को सुनकर याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। एडवोकेट संजय यादव का कहना था कि याची की सीआरपीसी की धारा 125 की अर्जी को न्यायाधिकारी ने 30 नवंबर 2024 को निस्तारित किया लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया तो याची ने बीएनएसएस की धारा 147 की निष्पादन अर्जी दाखिल की, जो विचाराधीन है। याचिका में इस अर्जी को शीघ्र निस्तारित करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा सातव ग्राम न्यायालय एक्ट की धारा 12 गुजारा भत्ता दिलाने का क्षेत्राधिकार तय करती है। दोनों इसे लेकर दाखिल अर्जी की सुनवाई कर सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट की तरह ग्राम न्यायालय को भी गुजारा भत्ता दिलाने की अर्जी की सुनवाई करने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने बीएसए मथुरा स्पष्टीकरण के साथ किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के बीएसए के आचरण पर सख्त टिप्पणी करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने कुशल सिंह की याचिका पर अधिवक्ता जाह्नवी सिंह व रवींद्र सिंह को सुनकर दिया है। कोर्ट ने गत 30 जनवरी को याची के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसे अगली तिथि तक बढ़ा दिया गया है। कोर्ट को बताया गया कि बीएसए मथुरा ने न्यायालय के निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया।
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार बीएसए पर शिक्षकों की अनुपस्थिति के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बार-बार संदेश भेजने का आरोप है। इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की बजाय बीएसए ने जल्दबाजी में 23 फरवरी को जांच पूरी कराकर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। कोर्ट ने इस आचरण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बीएसए ने स्वयं को बचाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है। साथ ही बीएसए मथुरा को 27 अप्रैल को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह स्पष्ट भी किया कि याची को किसी प्रकार से परेशान किया जाता है तो वह इसे शपथपत्र के माध्यम से रिकॉर्ड पर ला सकता है।




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