यूपी में बाहुबलियों की कुंडली खंगाल रही पुलिस, इस जिले में 185 दागियों के पास लाइसेंसी असलहे
गोरखनाथ क्षेत्र में 14 अगस्त 2019 को तनवीर खान नामक व्यक्ति के पास फर्जी शस्त्र लाइसेंस मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। तब जिले में बड़े पैमाने पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने का खुलासा हुआ था। दो पूर्व असलहा बाबू राम सिंह और अशोक गुप्ता समेत 24 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

UP News : लाइसेंसी असलहों को लेकर पुलिस जहां बाहुबलियों और दागियों की कुंडली खंगाल रही है, वहीं, जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, गोरखपुर जिले में 21 हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें 185 ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि इनमें अधिकांश लाइसेंस मिलने के बाद दागी बने हैं। कुछ मामलों में पुलिस ने उनके शस्त्र लाइसेंस निरस्त भी कराए हैं।
बड़हलगंज क्षेत्र के दौनाडीह गांव निवासी और वर्तमान में सुल्तानपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद रामभुआल निषाद का नाम भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में सामने आ चुका है। वह थाने के हिस्ट्रीशीटर भी हैं और उन पर कूटरचित तरीके से लाइसेंस बनवाने का आरोप है। इस मामले में मुकदमा विचाराधीन है।
छह साल पहले खुला था फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट
गोरखनाथ क्षेत्र में 14 अगस्त 2019 को तनवीर खान नामक व्यक्ति के पास फर्जी शस्त्र लाइसेंस मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच में जिले में बड़े पैमाने पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने का खुलासा हुआ। मामले की जांच के दौरान दो पूर्व असलहा बाबू राम सिंह और अशोक गुप्ता समेत 24 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में एसआईटी गठित की गई, जिसकी जांच में सामने आया कि कलक्ट्रेट के कई कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी लाइसेंस जारी किए गए थे। इस खुलासे के बाद जिले में बड़ी संख्या में लाइसेंस की जांच कराई गई थी।
आठ हजार लाइसेंसियों का सत्यापन बड़ी चुनौती
गोरखपुर जिले में कुल 21,624 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें करीब 7,955 लाइसेंसी ऐसे हैं जो लाइसेंस बनवाने के बाद अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के लिए इन लाइसेंस धारकों का सत्यापन बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार इनमें कई लोग जिला छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ के वर्तमान पते की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन अब लाइसेंसियों का दोबारा सत्यापन कराने की तैयारी में जुटा है।
सांसद पर फर्जी लाइसेंस से असलहा खरीदने का आरोप
पूर्व मंत्री और वर्तमान सांसद रामभुआल निषाद पर मुंडेरा निवासी बेचू यादव पुत्र महेंद्र यादव के नाम से स्वीकृत शस्त्र लाइसेंस नंबर पर अपने नाम से फर्जी लाइसेंस तैयार कराकर और उसी के आधार पर राइफल खरीदने का आरोप है। पुलिस रिपोर्ट के बाद डीएम कोर्ट में मामले की जांच हुई, जिसमें प्रथम दृष्टया लाइसेंस फर्जी पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि असली लाइसेंसी बेचू यादव की मौत हो चुकी है और उनका असलहा दुकान में जमा है। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने रामभुआल निषाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। असलहा बाबू सुनील कुमार गुप्ता की तहरीर पर बड़हलगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
नौ वर्षों में 178 शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट
गोरखपुर पुलिस ने पिछले नौ वर्षों में 178 दागियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए अपनी रिपोर्ट दी है। ये वे लोग थे, जिनके खिलाफ लाइसेंस जारी होने के बाद विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस लगातार इस प्रयास में रही कि जिन लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके लाइसेंस निरस्त कराए जाएं। हालांकि कुछ मामलों में लाइसेंस निरस्त हुए, जबकि कुछ अब भी प्रभावी हैं।




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