यूपी: अब 5 साल की बच्ची पर डाग अटैक, सुप्रीम कोर्ट दे चुका है खूंखार कुत्तों को सजा-ए-मौत की इजाजत
वीर सिंह ने बताया कि उनकी पांच साल की बेटी जीविका बुधवार की सुबह मंदिर में दर्शन के लिए गई थी। इसी दौरान आवारा कुत्तों का झुंड उसके पीछे पड़ गया। बच्ची रोते हुए घर की ओर भागी, तभी आसपास मौजूद लोगों ने दौड़कर उसे बचाया। स्थानीय लोगों में नगर पालिका के खिलाफ गुस्सा है।

UP News : भीषण गर्मी के साथ कुत्ते आक्रामक होने लगे हैं। आए दिन कुत्तों के हमलों से लोग दहशत में हैं। मंगलवार को बिजनौर के धामपुर इलाके की क्षत्रिय नगर कॉलोनी में शिव मंदिर के पास पांच वर्षीय बच्ची पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। बच्ची रोते हुए घर की ओर भागी, तभी आसपास मौजूद लोगों ने दौड़कर उसे बचाया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही रेबीज से पीड़ित, लाइलाज बीमार अथवा खतरनाक लावारिस और पागल कुत्तों को मारने-दयामृत्यु की मंगलवार को अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत ने लावारिस कुत्तों से मानव जीवन को होने वाले खतरों को कम करने के लिए यह आदेश दिया है।
वीर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी जीविका (उम्र 5 साल) बुधवार की सुबह मंदिर में दर्शन के लिए गई थी। इसी दौरान आवारा कुत्तों का झुंड उसके पीछे पड़ गया। बच्ची रोते हुए घर की ओर भागी, तभी आसपास मौजूद लोगों ने दौड़कर उसे बचाया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर पालिका के खिलाफ रोष व्याप्त है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नगर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता रहा है। पालिका प्रशासन समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। मंदिर के पुजारी हर्षवर्धन शर्मा, शिशुपाल, पंकज माहेश्वरी और उदयराज सिंह ने प्रशासन से तत्काल आवारा कुत्तों को पकड़वाने की मांग उठाई।
वहीं आए दिन कुत्तों के हमले में घायल होकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। पीएचसी प्रभारी डॉ.अंकित कुमार का कहना है कि कुत्तों के काटने के बाद रोज 20 से 25 मरीज एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहे हैं। इनमें कई बंदरों के हमले से भी घायल होते हैं। चिकित्सा प्रभारी का दावा है कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा रेबीज, एंटी रेबीज उपलब्ध हैं।
क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने?
जस्टिस विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की विशेष पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि लावारिस कुत्तों को मारने की अनुमति देना सबसे महत्वपूर्ण निर्देश है जो वह नगर निगमों/निकायों के अधिकारियों को जारी कर रही है। पीठ ने कहा, नगर निगम और नगर निकाय उन क्षेत्रों में इस आदेश का सहारा ले सकते हैं जहां लावारिस कुत्तों की आबादी खतरनाक रूप से बढ़ गई गई है। साथ ही जहां बार-बार कुत्तों के काटने से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। पीठ ने कहा कि सक्षम अधिकारी योग्य पशु विशेषज्ञों द्वारा उचित जांच-परख के बाद और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960, पशु जन्म नियंत्रण नियम-2023 तथा अन्य लागू कानूनी प्रोटोकॉल के प्रावधानों का सख्ती से पालन करते हुए लावारिस, बीमार और पागल कुत्तों को मार सकते हैं।




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