Naseemuddin Siddiqui joins SP in Akhilesh yadav presence his wife also joins Samajwadi Party अखिलेश की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल, पत्नी-बेटा भी समाजवादी हुए, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अखिलेश की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल, पत्नी-बेटा भी समाजवादी हुए

कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर उनकी पत्नी और बेटा भी सपा में शामिल हुए। इसके अलावा भी कई पूर्व विधायक और नेताओं ने सपा का दामन थामा।

Sun, 15 Feb 2026 01:14 PMsandeep लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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अखिलेश की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल, पत्नी-बेटा भी समाजवादी हुए

यूपी चुनाव से पहले समाजावादी पार्टी का कुनबा और बड़ा हो गया है। हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। अखिलेश ने माला पहनाकर स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिह्न के साथ अहिल्याबाई की तस्वीर भेंट की।इस मौके पर उनकी पत्नी और बेटा भी पार्टी में शामिल हुए। पार्टी में शामिल होने वालों में प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, बसपा नेता अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू और AIMIM से जुड़े रहे दानिश खान भी शामिल हुए। इसके अलावा महिला नेताओं में रचना पाल, हुसना सिद्दीकी, पूनम पाल और अलका समेत कई कार्यकर्ताओं ने सपा की सदस्यता ग्रहण की।

कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने समाजवादी विचारधारा और संगठन को मजबूत करने का संकल्प जताया। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि समाजवाद और समाजवादी पार्टी का ही आपस में संबंध है। देश की दशा को सुधारे वाले और नई देशा देने वाले समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को दिल की गहराइयों से श्रद्धांजलि देता हूं। मैं हमेशा उनसे प्रभावित रहा हूं। किसी पार्टी में रहा हूं मैंने हमेशा नेताजी का हमेशा सम्मान किया।

सारे समाज को साथ लेकर चल रहे अखिलेश- सिद्दीकी

सिद्दीकी ने शायराना अंदाज में कहा कि हयात लेके चलो, कायनात लेके चलो। चलो तो सारे जमाने को साथ ले के चलो। अखिलेश यादव ऐसे ही नेता हैं जो सभी समाज को लेकर चल रहे हैं। बीएसपी से जो भी नेता सपा में शामिल हुए उन्हें मैं बता दूं कि सपा में आज से सभी हमारे वरिष्ठ हैं। हम लोग उनसे जूनियर हैं। 15718 लोग सपा में शामिल हो रहे हैं। फूल बाबू और बाबू सिंह कुशवाहा आदि सभी लोगों के साथ हम लोग पहले काम कर चुके हैं।

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नसीमुद्दीन के साथ सपा में शामिल होने वाले नेता

हुसना सिद्दीकी (पत्नी)

अफजल सिद्दकी (बेटा)

राधेलालस पूर्व विधायक बस्ती

मौलाना जगीर, पूर्व विधायक

गेरालाल अहिरवार

बजरंग बली

शाहिद बेग

तौकर आजमी

सईद सिद्दीकी

शिव शंकर लोधी

विनोद, बामसेफ प्रदेश अध्यक्ष

यूसुफ खां भाईचारा के प्रभारी

ख्वजा दीन, बसपा

शंभू प्रजापति

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव ने कहा कि भाईचारा और बहुजन समाज को लेकर चलने वाले नसीमुद्दीकी आदि सभी नेताओं का सपा में स्वागत करता हूं। बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का रिश्ता गहरा होता जा रहा है। होली मिलन से पहले पीडीए का होली मिलन हो रहा है। ये पीडीए की जीत को और बड़ा करेगी। कुछ लोग तो ऐसे हैं तो हमारे शंकराचार्य को भी अपमानित कर रहे हैं, जो पीड़ित दुखी और अपमानित है। उसके साथ पीडीए है। इसीलिए शंकराचार्य के साथ पीडीए है। कोई गेरुआ और पीतांबर वस्त्र धारण करने वाले को हम सम्मानित नजरों से देखने लगते हैं। लेकिन जब भी मुंह खोला तो बुरा बोला।

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कौन हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी?

नसीमुद्दीन सिद्दीकी यूपी की राजनीति के चर्चित मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका सियासी सफर कई बड़े उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 4 जून 1959 को जन्मे सिद्दीकी का राजनीतिक बैकग्राउंड पारिवारिक नहीं था। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद वे रेलवे ठेकेदारी से जुड़े। लेकिन 1990 के आसपास बसपा संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आने के बाद उनकी सक्रिय राजनीति शुरू हुई।

बसपा से शुरू हुआ सियासी सफर

नगर पालिका चुनाव से शुरुआत करते हुए उन्होंने 1991 में बसपा के टिकट पर बांदा सदर विधानसभा सीट जीती और पार्टी में तेजी से उभरे। वे बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे और संगठन में मजबूत मुस्लिम चेहरा माने गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ रही। हालांकि 2017 में उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अलग राजनीतिक राह तलाशनी शुरू की।

जिसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें प्रदेश स्तर पर मुस्लिम नेतृत्व के तौर पर आगे बढ़ाया, लेकिन संगठन में सक्रिय भूमिका न मिल पाने और वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया। लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच वे नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश के बीच अब सपा में शामिल हो गए हैं।

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