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पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, उसकी वाणी... शंकराचार्य पर योगी के बयान को अखिलेश ने पाप बताया

शंकराचार्य विवाद को लेकर सीएम योगी के बयान पर अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसा। उन्होंने बयान को अपमानजनक बताते हुए भाजपा पर अहंकार और धर्म की राजनीति का आरोप लगाया। योगी ने कहा था कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

Sat, 14 Feb 2026 01:21 PMsandeep लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’, उसकी वाणी... शंकराचार्य पर योगी के बयान को अखिलेश ने पाप बताया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा में शंकराचार्य को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान के जरिए कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य के बारे में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना शाब्दिक हिंसा के समान है और यह पाप की श्रेणी में आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि राजनीतिक अहंकार को भी दर्शाते हैं।

'ताली बजाने वाले भी पाप के भागीदार होंगे'

अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग महाकुंभ के दौरान हुई मौतों के सही आंकड़े तक सार्वजनिक नहीं करते और मुआवजे में भी पारदर्शिता नहीं दिखाते, उन्हें किसी के धार्मिक पद या परंपरा पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने भाजपा विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग सदन में तालियां बजा रहे हैं, उन्हें जनता के बीच जाकर जवाब देना पड़ेगा।

सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि जब अहंकार बोलता है तो व्यक्ति की भाषा और व्यवहार बदल जाता है, जिससे समाज में उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले लोग समाज को बांटने का काम कर रहे हैं और जनता आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी।

हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता- योगी

दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद अत्यंत पवित्र और सर्वोच्च माना जाता है और हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कानून का शासन सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

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सीएम योगी ने माघ मेले और मौनी अमावस्या के दौरान हुई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे और किसी भी व्यक्ति को व्यवस्था बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो पूर्व में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई थी।

पोस्टरबाजी वाले नेता रह गए अखिलेश- संजय निषाद

वहीं इस मामले पर योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता से बाहर हैं, बयानबाजी और पोस्टरबाजी वाले नेता रह गए हैं उनपर क्या कहना है। उन्होंने अपने समय में कितना सम्मान दिया? हमारी सरकार धर्म, महात्मा, संत को कितना सम्मान देती है यह सबको पता है।

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