Constitutional Recognition to Nari Shakti Nari Vandan Adhiniyam opens a new chapter of empowerment after decades of wait नारी शक्ति को संवैधानिक सम्मान: दशकों की प्रतीक्षा के बाद ‘नारी वंदन अधिनियम’ से खुला सशक्तिकरण का नया अध्याय, Meerut Hindi News - Hindustan
More

नारी शक्ति को संवैधानिक सम्मान: दशकों की प्रतीक्षा के बाद ‘नारी वंदन अधिनियम’ से खुला सशक्तिकरण का नया अध्याय

Meerut News - मेरठ, मुख्य संवाददाता भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण आया है, जिसका

Thu, 16 April 2026 11:36 AMNewswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
share
नारी शक्ति को संवैधानिक सम्मान: दशकों की प्रतीक्षा के बाद ‘नारी वंदन अधिनियम’ से खुला सशक्तिकरण का नया अध्याय

मेरठ, मुख्य संवाददाता भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण आया है, जिसका इंतजार देश की करोड़ों महिलाओं को कई दशकों से था। लंबे समय से लंबित ‘नारी वंदन अधिनियम’ के पारित होने के साथ ही महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में एक नया और सशक्त अधिकार प्राप्त हुआ है। यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है।यह मानना है समाजसेविका और एडवोकेट शाहीन परवेज का। उनका मानना है कि महिला आरक्षण की मांग कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जब पहली बार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव सामने आया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:नारी शक्ति को संवैधानिक सम्मान: दशकों की प्रतीक्षा के बाद ‘नारी वंदन अधिनियम’ से खुला सशक्तिकरण का नया अध्याय

उस समय से लेकर अब तक यह मुद्दा लगातार चर्चा में रहा, लेकिन हर बार यह किसी न किसी कारणवश अटकता रहा। कभी राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई, तो कभी विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों ने इसे आगे बढ़ने से रोक दिया।शाहीन परवेज के अनुसार लगभग तीन दशकों तक यह विधेयक संसद की बहसों, समितियों और राजनीतिक खींचतान के बीच उलझा रहा। इस दौरान देश की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन किया—चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान, खेल, प्रशासन या व्यवसाय—हर जगह महिलाओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बावजूद राजनीति में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित ही रही।ऐसे में ‘नारी वंदन अधिनियम’ का पारित होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस लंबे समय से लंबित मुद्दे को प्राथमिकता दी और इसे निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया। संसद के विशेष सत्र में इस विधेयक को पेश कर पारित कराया गया, जो सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।इस अधिनियम के लागू होने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह व्यवस्था न केवल महिलाओं को राजनीतिक मंच पर बराबरी का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि देश के नीति निर्माण में उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित करेगी।इस फैसले का प्रभाव केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक संरचना में भी व्यापक परिवर्तन लाएगा। जब महिलाएं निर्णय लेने वाली भूमिका में होंगी, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, बाल विकास और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर अधिक संवेदनशील और संतुलित नीतियां सामने आएंगी।विशेषज्ञों और सामाजिक चिंतकों का मानना है कि यह अधिनियम देश के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और मजबूत बनाएगा। इससे महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलेंगे, जिससे वे न केवल अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगी, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।यह अधिनियम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं अब राजनीति में भागीदारी के लिए अधिक प्रेरित होंगी और समाज में अपनी पहचान को और मजबूत कर पाएंगी। इससे देश में महिला नेतृत्व का एक नया युग प्रारंभ होगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस और ऐतिहासिक फैसले लेने में सक्षम है। यह कदम महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनने से सशक्त होंगी महिलाएं
read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सामाजिक आवश्यकता है नारी सशक्तिकरण- सुनीता

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।