मर चुकी बेटी के लिए लगाई थाली, लाश के पास बैठकर खाना खाया; पिता ने खोले 5 महीने के राज
प्रियंका की मौत नवंबर 2025 में हो गई थी। उसकी लाश को मकान में ही बंद करके उदयभानु हरिद्वार चला गया था। 10 अप्रैल को उदयभानु मेरठ आया तो परिजनों ने देख लिया और पूछताछ की। प्रियंका के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया। उदयभानु ने बताया कि प्रियंका की मौत हो चुकी है और लाश घर के अंदर है।

UP News: उत्तर प्रदेश के मेरठ की ये घटना जिसने भी सुनी वो हैरान रह गया है। एक पिता ने अपनी बेटी की मौत के बाद 5 महीने तक लाश को घर में बंद रखा। बदबू न आए इसलिए उसने लाश पर परफ्यूम छिड़का। घर को बंद कर हरिद्वार चला गया और फिर बेटी की लाश देखने के लिए तीन बार हरिद्वार से मेरठ आया था। उसने घर के अंदर ही लाश के पास बैठकर खाना खाया। एक थाली बेटी के लिए लगाई और दूसरी में खुद खाना खाया। उदयभानु की मोबाइल की लोकेशन और पूछताछ के बाद 5 महीने की इन सब बातों का खुलासा हुआ है।
मेरठ के सदर बाजार के तेली मोहल्ला निवासी प्रियंका की मौत नवंबर 2025 में हो गई थी। प्रियंका की लाश को मकान में ही बंद करके उदयभानु हरिद्वार चला गया था। 10 अप्रैल को उदयभानु मेरठ आया तो परिजनों ने देख लिया और पूछताछ की। प्रियंका के बारे में जानकारी का प्रयास किया, जिसके बाद उदयभानु ने बताया कि प्रियंका की मौत हो चुकी है और लाश घर के अंदर है। पुलिस की अभी तक की जांच में खुलासा हुआ कि 14 नवंबर 2025 से 26 नवंबर के बीच प्रियंका की मौत हुई है। यानी लाश पांच माह घर के अंदर बंद रही। पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि प्रियंका की मौत के बाद दुर्गंध छिपाने के लिए उदयभानु ने परफ्यूम डाला था। इसके बाद पांच दिसंबर को लाश को मकान में बंद कर उदयभानु हरिद्वार चला गया था और 15 दिसंबर को धर्मशाला में कमरा लिया था।
पंडित से की थी अंतिम संस्कार के लिए बात
पुलिस ने हरिद्वार में उस पंडित को भी तलाश लिया है, जिससे उदयभानु ने बेटी प्रियंका के अंतिम संस्कार की बात की थी। पूछा था कि बेटी की लाश मेरठ में है और अंतिम संस्कार कैसे होगा। पंडित ने बताया था कि अंतिम संस्कार मेरठ में ही कर लो और तेरहवीं हरिद्वार में करा देंगे। पंडित के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं।
बोला- बेटी की मौत के बाद दिमाग सुन्न हो गया
उदयभानु ने बताया कि बेटी की मौत के बाद दिमाग सुन्न हो गया था। कुछ समय नहीं आया कि क्या करूं। परेशान हो गया था और बेटी अंतिम संस्कार भी नहीं करा पाया। कोई अपना नहीं था और अकेला था। समझ नहीं आया कि बेटी की लाश को कंधा कैसे दूं। परेशान हो गया तो घर बंद कर हरिद्वार चला गया।
30 हजार पेंशन, फिर भी ऐसी स्थिति
उदयभानु के खाते में हर माह 30 हजार रुपये पेंशन आती है। इसके बावजूद उसके घर की हालत देखक लोग हैरान है। बेटी प्रियंका की बीमारी का भी ठीक से किसी डॉक्टर के पास उपचार नहीं कराया। ऐसे में पुलिस ये जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर ये रकम कहां खर्च की।
मानसिक स्थिति की जांच को बना पैनल
मेरठ के सदर बाजार में बेटी प्रियंका की मौत के बाद लाश पर परफ्यूम छिड़कने और घर को बंद कर हरिद्वार जाने वाले उदयभानु की मानसिक स्थिति की जांच के लिए डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है। सीएमओ कार्यालय से इसके लिए पत्राचार भी किया गया है। पुलिस आशंका जता रही है कि उदयभानु की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और इसलिए जांच की जरूरत है। उदयभानु की जांच का काम बुधवार से शुरू हो सकता है। तीन डॉक्टरों का पैनल उदयभानु से बात करेगा और इसके बाद कुछ जांच भी कराई जाएगी। इसके बाद ही रिपोर्ट पुलिस को दी जाएगी। यदि मानसिक स्थिति ठीक मिली तो पुलिस शव की दुर्दशा करने और संक्रमण फैलाने की धारा में मुकदमा दर्ज करेगी। यदि मानसिक स्थिति ठीक नहीं मिली तो उदयभानु को उपचार के लिए अस्पताल भर्ती कराया जाएगा।
मौलाना और उदयभानु की 100 से ज्यादा कॉल रिकार्डिंग
पुलिस को जांच के दौरान मौलाना और उदयभानु के बीच हुई बातचीत की 100 से ज्यादा कॉल रिकार्डिंग मिली है। इनमें से कुछ कॉल में प्रियंका ने भी मौलाना से बात की है। बातचीत के दौरान उदयभानु कहता है कि बेटी के लिए दुआ करना मौलाना साहब। हालांकि मौलाना लगातार इस बात पर जोर देता रहा कि डॉक्टर को दिखाते रहो और डॉक्टर की दवा भी देते रहो। ऐसे में पुलिस मानकर चल रही है कि मौलाना की प्रियंका की मौत में भूमिका अभी साफ नहीं है।




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