father gets daughter dead body after third day of her death on fathers day पिता के लिए यातना बन गया सरकारी सिस्‍टम, मौत के 45 घंटे बाद फादर्स डे पर मिली बेटी की लाश , Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पिता के लिए यातना बन गया सरकारी सिस्‍टम, मौत के 45 घंटे बाद फादर्स डे पर मिली बेटी की लाश 

कानपुर में सरकारी सिस्‍टम एक पिता के लिए यातना का सबब बन गया। दो बेटियों की अर्थी को पहले ही कंधा दे चुके इस बेबश पिता को तीसरी बेटी की मौत के 45 घंटे बाद फादर्स डे पर उसकी लाश मिली।

Mon, 20 June 2022 02:21 PMAjay Singh शशांक दीक्षित, कानपुर
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पिता के लिए यातना बन गया सरकारी सिस्‍टम, मौत के 45 घंटे बाद फादर्स डे पर मिली बेटी की लाश 

कानपुर के बर्रा-2 में दरोगा चौराहे के पास रहने वाले दयादास के लिए सरकारी सिस्टम किसी यातना से कम नहीं रहा। दो बेटियों की अर्थी को पहले ही कंधा दे चुके दयादास की आखिरी बेटी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। वह इस असहनीय गम को दिल में लिए दो दिन से बदहवास बैठे थे कि बेटी का शव मिल जाए मगर सरकारी सिस्टम संवेदनहीन हो गया। 45 घंटे बाद पोस्टमॉर्टम के बाद लाश फादर्स डे की शाम को सौंपी गई तो उनकी आंखें डबडबा गईं।

दयादास की तीन बेटियां थीं। बड़ी बेटी बबिता गौतम की वर्ष 2008 में दहेज न मिलने के कारण हत्या हो गई थी। मझली बेटी ममता गौतम प्रसव के दौरान वर्ष 2012 में चल बसी। 28 वर्षीया तीसरी बेटी सरिता गौतम ने शुक्रवार को हरवंश मोहाल थाना क्षेत्र के एक होटल में फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने उसी शाम 6 बजे तक शव कब्जे में ले लिया था मगर पोस्टमॉर्टम रविवार की शाम को हो सका। ये 45 घंटे दयादास के लिए किसी एक युग की तरह गुजरे। 60 साल की उम्र में वह स्वास्थ्य विभाग का चक्कर लगाते रहे। गुहार करते रहे कि पोस्टमॉर्टम करके बेटी की लाश दे दो। मगर, पूरा सिस्टम ही मानवता को शर्मसार करने वाला साबित हुआ।

पुलिस ने कहा, हमसे चूक नहीं हुई

इस मामले में थाना प्रभारी सूर्यबली पांडेय कहते हैं कि परिवार को अगले दिन बेटी के शव के लिये परेशान न होना पड़े इसके लिए तत्परता दिखाई गई थी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर घटना वाली रात डीएम से अनुमति कराकर एसीएम 4 से पंचायतनामा भरवा लिया गया था। इसके बाद सीएमओ ने वीडियोग्राफी समेत पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम का आदेश दे दिया था। डॉक्टरों के जो नाम तय किए गए थे उसमें कुछ गड़बड़ी हो गई थी। नाम कुछ गलत हो गया था। इसमें भी सुधार कराते हुए शनिवार शाम साढ़े तीन बजे कागज पोस्टमॉर्टम पहुंच गए थे।

नाम में गड़बड़ी ठीक होने के बाद भी राहत नहीं

हकीकत यह है कि डॉक्टर के नाम में गड़बड़ी ठीक किए जाने के बाद भी शव का इंतजार कर रहे दयादास को राहत नहीं दी गई। शनिवार की देर शाम कागज पहुंचने की वजह से दयादास को फिर से टरका दिया गया। कहा गया कि शाम पांच बजे तक ही पोस्टमॉर्टम होता है। दयादास गुहार लगाते रहे मगर पोस्टमॉर्टम पर तैनात अधिकारियों का दिल न पसीजा। रात भर दयादास रोते रहे। रविवार तड़के फिर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। मगर, इसके बाद भी उन्हें शाम तक इंतजार करना पड़ा। बेटी का शव फादर्स डे पर ही मिला। वह कहते हैं कि सरिता हर फादर्स डे कहा करती थी-पापा, विश यू हैपी फादर्स डे।

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