यूपी में मुकाबला एकतरफा नहीं, अखिलेश के पक्ष में कुमार विश्वास क्या बोल गए? खूब हो रही चर्चा
कवि कुमार विश्वास ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी बात बोल दी है। उन्होंने कहा कि यूपी का चुनावी मुकाबला एकतरफा नहीं है। विश्वास के अनुसार, अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में जो सफलता हासिल की है, उसका प्रभाव विधानसभा चुनाव में और भी ज्यादा शक्तिशाली तरीके से दिखेगा।

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। भाजपा हैट्रिक लगाने की तैयारी में है तो समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव वाला प्रदर्शन दोहराने को लेकर दृढ निश्चय दिखाने की कोशिश करती रहती है। इस बीच जाने-माने कवि और यूपी की राजनीति में अपनी किस्तम आजमा चुके कुमार विश्वास ने आने वाले विधानसभा चुनाव और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर ऐसी बातें कह दी हैं जिससे राजनीतिक हलके में हलचल मची हुई है।
यूट्यूब चैनल जिगाबाद के साथ बातचीत में कुमार विश्वास ने कहा कि आज की बात करें तो उत्तर प्रदेश का चुनावी मैदान एकतरफा बिल्कुल नहीं है। यहां का मैदान फंसा हुआ है। लोकसभा में अखिलेश यादव का जो चेक चला वह बाउंस नहीं हुआ है। बहुत सारे लोगों को भ्रम है कि लोकसभा चुनाव में चल गया तो अब नहीं चलेगा, ऐसा नहीं है। बल्कि विधानसभा चुनाव में वह ज्यादा शक्तिशाली है। कुमार विश्वास ने कहा कि लोकसभा बड़ी सीट होती है। विधानसभा में तो छोटी-छोटी सीटें होती हैं। ऐसे में विधानसभा में उसे चलाना ज्यादा आसान है।
कुमार विश्वास ने कहा कि यूपी और बिहार के चुनाव जातीय समीकरण पर होते हैं। बिहार में भाजपा की नई सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वहां आपको मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री चुनना पड़ा तो आप अपनी पार्टी के काडर पर नहीं गए। आपको जातीय समीकरण साधने पड़े। यह जो नई भाजपा है, यह जीतने के लिए बनी है। यह अटलजी वाली भाजपा नहीं है। यह नई पार्टी है जो कहती है कि हम पहले शासन में आएंगे तभी कुछ पाएंगे। हमने जो देश के बारे में सोचा है, उसे सरकार में आने के बाद ही कर सकेंगे।
कहा कि जैसे कृष्ण नीति है, छोटा-छोटा काम छोड़ों और बड़ा लक्ष्य देखो। उसी तरह यूपी में एक बड़ा काम जातीय ध्रुवीकरण है। जातियां अलग अलग बंटी हुई हैं। इसलिए ही यूपी के मैदान को एकतरफा मैदान नहीं मानना चाहिए। कुमार विश्वास ने कहा कि अखिलेश के लिए यह चुनाव अस्तित्व का चुनाव है। वह दो चुनाव हार चुके हैं और लोकसभा में जीत हासिल करने के बाद वहां हैं।
कुमार विश्वास का इशारा स्पष्ट रूप से लोकसभा चुनाव 2024 में सपा 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। कांग्रेस-सपा गठबंधन यूपी की 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा को बड़ा झटका दिया था। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में 63 सीटें जीतने वाली भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई थी। भाजपा ने सपा की जीत को जहां संविधान बचाने के नाम पर फैलाए गए 'झूठ' की जीत बताया, वहीं कुमार विश्वास इसे यूपी में हो रही जातीय गोलबंदी मानते हैं। सपा ने लोकसभा चुनाव में पीडीए यानी पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक को भी मुद्दा बनाया था। तब मिली जीत के बाद से ही इस मुद्दे को और धार देने में लगे हुए हैं। यही कारण है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल अखिलेश यादव पर जातिवाद करने और बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते रहते हैं।




साइन इन