शताब्दी समेत कई ट्रेनों का आज से रूट बदला, रेल यात्रियों को डेढ़ महीने तक झेलनी होंगी मुश्किलें
कानपुर सेंट्रल रेलवे ब्रिज पर इंजीनियरिंग कार्य के चलते 2 अप्रैल से 13 मई तक रेल यातायात प्रभावित रहेगा। शताब्दी एक्सप्रेस समेत 27 ट्रेनों का रूट बदला गया है और 16 ट्रेनें लखनऊ नहीं आएंगी। इससे दैनिक यात्रियों की सबसे ज्यादा मुश्किलें बढ़ गई हैं।

UP News: कानपुर सेंट्रल से कानपुर पुल बायां किनारा के बीच रेलवे ब्रिज पर इंजीनियरिंग काम गुरुवार से शुरू हो जाएगा। इससे करीब डेढ़ महीने यात्रियों को मुश्किलें झेलनी होंगी। 13 मई तक लखनऊ से कानपुर तक ट्रेन का सफर प्रभावित होगा। इस दौरान आगरा इंटरसिटी, झांसी इंटरसिटी, पुणे एक्सप्रेस समेत 16 ट्रेनें लखनऊ नहीं आएंगी। इसके अलावा 27 ट्रेनों का रूट बदला रहेगा। रेलवे ने यात्रियों से ट्रेनों की वास्तविक स्थिति की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 139 पर सम्पर्क करने की अपील की है।
कानपुर से डायवर्ट की गई ट्रेनें
आगरा फोर्ट-लखनऊ इंटरसिटी (12180): 13 मई तक यह ट्रेन केवल कानपुर सेंट्रल तक आएगी। वापसी में (12179) लखनऊ के बजाय कानपुर से ही शाम 5:25 बजे रवाना होगी।
झांसी इंटरसिटी (11109/11110): वीरांगना लक्ष्मीबाई जं. से लखनऊ आने वाली इंटरसिटी अब कानपुर तक ही सीमित रहेगी।
पुणे एक्सप्रेस (12103/12104): पुणे से आने वाली ट्रेन कानपुर तक आएगी और वापसी में लखनऊ के स्थान पर कानपुर से ही शाम 6:00 बजे चलेगी।
कासगंज पैसेंजर: कासगंज-लखनऊ पैसेंजर अब कानपुर अनवरगंज तक ही संचालित होगी।
13 मई तक बदले रूट से चलेंगी ये गाड़ियां
शताब्दी एक्सप्रेस (12004) 13 मई तक गाजियाबाद-मुरादाबाद के रास्ते चलेगी। यह ट्रेन अलीगढ़, टूंडला और कानपुर जैसे स्टेशनों पर नहीं रुकेगी।
बरौनी/दरभंगा स्पेशल ये ट्रेनें बुढ़वल-सीतापुर सिटी-बरेली-मुरादाबाद के रास्ते चलाई जाएंगी। बांद्रा टर्मिनस (20921) कासगंज-शाहजहांपुर-आलमनगर होते हुए लखनऊ पहुंचेगी।
इन ट्रेनों का लखनऊ से टूटा संपर्क
नई दिल्ली-बरौनी (02564), नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल (02570), उदयपुर सिटी-कामाख्या (19615), सूरत-मुजफ्फरपुर (19053) और साबरमती-मुजफ्फरपुर (15270) जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा यशवंतपुर-गोरखपुर, पनवेल-गोरखपुर और ओखा-गोरखपुर जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित रहेंगी।
दैनिक यात्रियों की चिंता बढ़ी
डेढ़ महीने तक चलने वाले इस मेगा ब्लॉक ने लखनऊ और कानपुर के बीच दैनिक यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से शताब्दी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन का रूट बदलना और इंटरसिटी ट्रेनों का कानपुर तक ही सीमित हो जाना, व्यवसायिक और व्यक्तिगत यात्राओं को प्रभावित करेगा। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनिवार्य है, क्योंकि पुराने पुल की मरम्मत समय की मांग थी।
यात्रियों की सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने कमान संभाली है, ताकि रेल संपर्क टूटने वाले शहरों तक लोगों को सुगमता से पहुंचाया जा सके। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) या हेल्पलाइन 139 पर ट्रेनों का वर्तमान स्टेटस अवश्य चेक कर लें, ताकि स्टेशन पहुंचकर परेशानी न उठानी पड़े।
रद्द ट्रेनों का विकल्प बनेंगी रोडवेज बसें
रेलवे की ओर से दो अप्रैल से रद्द ट्रेनों का विकल्प रोडवेज बसें बनेंगी। लखनऊ के आलमबाग और कैसरबाग से मथुरा, शाहजहांपुर और कैसरबाग के लिए रोडवेज बसें चलेंगी। हालांकि माना जा रहा है कि गर्मी की छुट्टी होने के कारण यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यह बसें नाकाफी ही रहेंगी।
आलमबाग से मथुरा: सुबह 8:30 बजे रवाना होकर शाम 4:00 बजे मथुरा पहुंचेगी। आलमबाग से शाहजहांपुर: रोजाना सुबह 8:30 बजे रवाना होकर दोपहर 1:30 पहुंचेगी। कैसरबाग से पीलीभीत: 9:00 बजे चलकर शाम 4:30 बजे पीलीभीत पहुंचगी।




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