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सरकारी डॉक्टरों को किसने कराई विदेशों की सैर? पिछले पांच साल का ब्योरा तलब, अफसरों की नींद उड़ी

उत्तर प्रदेश शासन ने 2020 से 2025 के बीच सरकारी डॉक्टरों द्वारा किए गए देश-विदेश के दौरों की जांच शुरू कर दी है। लखनऊ के केजीएमयू, पीजीआई सहित 8 संस्थानों से यात्राओं की फंडिंग और उद्देश्यों का ब्योरा मांगा गया है।

Mon, 27 April 2026 01:14 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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सरकारी डॉक्टरों को किसने कराई विदेशों की सैर? पिछले पांच साल का ब्योरा तलब, अफसरों की नींद उड़ी

UP News: डॉक्टरों को किसने देश-विदेशों का सैर सपाटा कराया। अब डॉक्टरों को इसका हिसाब देना होगा। शासन के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने साल 2020 से 2025 के बीच हुए दौरों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। लखनऊ समेत प्रदेश के आठ प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से डॉक्टरों की यात्राओं का ब्योरा तलब किया है। फाइलें खुल रही हैं। रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं-सवाल सीधा है, 'प्रायोजक' कौन था और मरीजों को क्या फायदा मिला? सवालों ने पूरे मेडिकल संस्थानों के अफसरों की नींद उड़ा दी है।

किसके पैसे से दौरे हुए

पीजीआई, लोहिया, केजीएमयू, कैंसर संस्थान, सीबीएमआर, ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान,नोएडा के बाल रोग चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर संस्थान, सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान को नोटिस जारी कर डॉक्टरों के देश-विदेश के दौरे से संबंध में ब्यौरा तलब किया गया है।

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निगरानी बढ़ाई गई

शासन स्तर पर बढ़ी निगरानी के तहत अब हर यात्रा के उद्देश्य व परिणामों की जांच होगी। शासन में अनु सचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला की तरफ से महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि यह एक व्यापक पड़ताल है। जिसमें यह देखा जाएगा कि कहीं सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।

संस्थानों में अफरातफरी

सख्ती से संस्थानों में अफरा-तफरी का माहौल है। रिकॉर्ड खंगालने में पसीना छूट रहा है। विदेश यात्राएं नई तकनीक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को सीखने का बड़ा जरिया होती हैं। लेकिन अगर उनका लाभ नजर न आए तो सवाल उठना लाजिमी है। आखिर मरीजों तक क्या पहुंचा? यह अब सबसे बड़ा मुद्दा है।

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फंडिंग पर उठे सवाल

शासन ने कहा है कि अब हर खर्च का हिसाब देना होगा। चाहे वह सरकारी हो, या कंपनी द्वारा प्रायोजित। कई डॉक्टर सेमिनार, कॉन्फ्रेंस व ट्रेनिंग के नाम पर विदेश गए। लेकिन उनके ठोस नतीजों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। कुछ मामलों में निजी कंपनियों की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि दवा कंपनियों ने अपने फायदे के लिए डॉक्टरों को अपने खर्च पर विदेश यात्राएं कराई हैं।

शासन से लेनी होगी इजाजत

विदेश यात्राओं को लेकर शासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अब डॉक्टरों को किसी भी सेमिनार, कार्यशाला, प्रशिक्षण या अन्य शैक्षिक गतिविधि के लिए विदेश जाने से पहले अनिवार्य रूप से शासन की अनुमति लेनी होगी। अब तक कई डॉक्टर बिना पूर्व स्वीकृति के ही विदेश दौरों पर जा रहे थे, जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया है। इस पर रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

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