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14 दिन डिजिटल अरेस्ट करने वाले दो शातिरों को खींच लाई यूपी पुलिस, 90 लाख ठगे थे

लखनऊ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये ठगने वाले दो और शातिरों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। गिरोह ने आलमबाग के एक दंपती को 14 दिन तक डराकर ठगी की थी।

Tue, 3 March 2026 11:30 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता
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14  दिन डिजिटल अरेस्ट करने वाले दो शातिरों को खींच लाई यूपी पुलिस, 90 लाख ठगे थे

Lucknow News: राजधानी लखनऊ की साइबर क्राइम सेल ने 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए करोड़ों रुपये डकारने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान और तमिलनाडु में छापेमारी कर गिरोह के दो और सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। यह गिरोह खुद को एटीएस (ATS) और सीबीआई (CBI) का अधिकारी बताकर लोगों को कई दिनों तक डिजिटल कैद में रखता था और डरा-धमकाकर उनके बैंक खाते खाली करवा लेता था।

14 दिन तक घर में किया 'कैद', वसूले 90 लाख

पुलिस उपायुक्त (अपराध) कमलेश कुमार दीक्षित के मुताबिक, इस गिरोह ने आलमबाग निवासी ट्रांसपोर्टर राकेश बाजपेयी और उनकी पत्नी वीना को अपना निशाना बनाया था। जालसाजों ने 26 जनवरी को वीना के मोबाइल पर व्हाट्सऐप वीडियो कॉल की। कॉल करने वाले मयंक ने खुद को एटीएस मुख्यालय का कर्मचारी बताया और वर्दी पहने 'जीतू' नाम के शख्स से बात कराई। शातिरों ने वीना पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोप लगाकर जेल भेजने की धमकी दी। डरे हुए दंपती को आरोपियों ने 14 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट (कैमरे के सामने रहने को मजबूर करना) रखा और अलग-अलग किस्तों में 90 लाख रुपये ठग लिए।

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दूसरे प्रदेशो से बना रहे शिकार

साइबर थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान के सीकर (थोई) निवासी जितेंद्र यादव और चीपलाटा निवासी मनोज यादव के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह मुख्य रूप से जयपुर और तमिलनाडु से संचालित हो रहा था। जितेंद्र गिरोह के मास्टरमाइंड के इशारे पर युवाओं को लालच देकर जोड़ता था, जबकि मनोज ठगी की रकम को सरगना द्वारा बताए गए विभिन्न 'म्यूल' खातों में ट्रांसफर करने का काम संभालता था। इससे पहले पुलिस दिल्ली, गाजियाबाद और गोरखपुर से जुड़े तीन अन्य सदस्यों को भी जेल भेज चुकी है।

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इंडोनेशिया और म्यांमार से जुड़े हैं तार

मामले की विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर रंजीत के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क भारत की सीमाओं के पार इंडोनेशिया, म्यांमार और थाइलैंड तक फैला हुआ है। ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा 'क्रिप्टो करेंसी' में बदलकर विदेशों में भेजा जाता था। विदेशी हैंडलर्स इंटरनेट कॉलिंग के जरिए जयपुर में बैठे अपने 'इंडिया हेड' को निर्देश देते थे, जो आगे भारत में अपने गुर्गों से काम कराता था। फिलहाल पुलिस टीम गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है, जिसकी गिरफ्तारी से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। सरगना को पकड़ने की कोशिश में पुलिस टीमें जुटी हैं।

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