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थाने में VIDEO बनाने पर पत्रकारों पर लिखवाएं मुकदमा, महिला सीओ का आदेश, शासन ने बैठाई जांच

मेरठ की सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वह थाने में वीडियो बनाने वाले पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे रही हैं। इस मामले में लखनऊ से जांच बैठा दी गई है।

Tue, 3 March 2026 11:14 AMYogesh Yadav मेरठ, मुख्य संवाददाता
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थाने में VIDEO बनाने पर पत्रकारों पर लिखवाएं मुकदमा, महिला सीओ का आदेश, शासन ने बैठाई जांच

Meerut News: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस और मीडिया के बीच टकराव का एक गंभीर मामला सामने आया है। सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या आस्थाना का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को निर्देश दे रही हैं कि यदि कोई पत्रकार थाने के भीतर वीडियो बनाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। इस ऑडियो के सामने आने के बाद पत्रकारों में भारी रोष फैल गया। सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर गूंजने लगे। मामला लखनऊ तक पहुंच गया और शासन स्तर से जांच बैठा दी गई है।

क्या है वायरल ऑडियो में?

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह ऑडियो लगभग 29 सेकेंड का है। इसमें कथित तौर पर सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना यह कहती सुनाई दे रही हैं कि "सभी थाने ध्यान दें, थाने के अंदर किसी पत्रकार द्वारा वीडियोग्राफी की जाती है तो तत्काल मुकदमा लिखवाएं। थाना टीपीनगर में अभी एक प्रकरण चल रहा है, मैंने उसको बता दिया है। अगर मुझे थाने के अंदर कोई पत्रकार वीडियो बनाते दिखा, तो मैं सख्त कार्रवाई करा दूंगी।" हालांकि, 'हिन्दुस्तान' इस वायरल ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

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लखनऊ से बैठी जांच, खुफिया विभाग भी सक्रिय

लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद एडीजी जोन ने जांच के आदेश दिए हैं। ऑडियो के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने भी पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) मीडिया सेल के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से इस ऑडियो को शेयर करते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की कोशिश बताया गया है। सपा ने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी कमियों को छिपाने के लिए पत्रकारों को मुकदमों का डर दिखा रही है, जो संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि पुलिस थाने में मीडिया की ओर से वीडियो रिकॉर्डिंग को आमतौर पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं माना जाता है। कोर्ट ने भी साफ किया है कि पुलिस थाना धारा 2(8) के तहत 'निषिद्ध स्थान' की श्रेणी में नहीं आता है।

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अधिकारियों का पक्ष

सीओ के वायरल बयान पर मामला गरमाने के बाद पुलिस कप्तान भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्देश पत्रकारों के लिए नहीं था। यह उन 'पोर्टल वालों' को लेकर दिया गया था जो अनावश्यक वीडियो बना रहे थे। कप्तान ने साफ किया कि थानों में वीडियो बनाने को लेकर मीडियाकर्मियों के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई भ्रम की स्थिति पैदा हुई है तो उसे दूर किया जाएगा। वहीं, पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने पारदर्शी तरीके से काम करने के बजाय पत्रकारों को निशाना बनाया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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