यूपी में इलाज करवाना हुआ महंगा, LPG और पेट्रोल के बाद अब प्लास्टिक के दाम बढ़ने से आफत
यूपी के गोरखपुर में व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति न होने से प्लास्टिक दाने का दाम 160 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। इससे डिस्पोजल सिरिंज, ग्लब्स, कैन्युला, ड्रिप सेट आदि आइटम महंगे हो गए हैं। खाड़ी में चल रहे युद्ध का प्रभाव अब पेट्रोलियम उत्पादों के साथ प्लास्टिक उत्पादों पर भी पड़ने लगा है।

यूपी के गोरखपुर में व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति न होने से प्लास्टिक दाने का दाम 160 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। इससे डिस्पोजल सिरिंज, ग्लब्स, कैन्युला, ड्रिप सेट आदि आइटम महंगे हो गए हैं। खाड़ी में चल रहे युद्ध का प्रभाव अब पेट्रोलियम उत्पादों के साथ प्लास्टिक उत्पादों पर भी पड़ने लगा है। खाड़ी युद्ध के चलते कच्चे माल का दाम भी बढ़ गया है। इससे प्लास्टिक से बनने वाले रबर और दूसरे सर्जिकल सामानों के दाम महंगे होने लगे हैं।
थोक दवा मंडी भालोटिया में सर्जिकल आइटम के विक्रेता अमन सर्जिकल के संचालक सुनील सिंह ने बताया कि सबसे पहले सिरिंज के निर्माताओं ने रेट को बढ़ाने का सर्कुलर जारी कर दिया। सिरिंज की खरीद में 2 से लेकर 10 फीसदी तक थोक रेट में बढ़ोतरी हुई है। तीन एमएल वाले सिरिंज का थोक आपूर्ति रेट अब 120 रुपए से 122 रुपए प्रति बॉक्स हो गया है। पहले यह 108 रुपए था। इसके अलावा कैथेडर, कमर के बेल्ट भी मंहगे हो रहे हैं। हालांकि अब तक 18 कंपनियों ने थोक विक्रेताओं को सप्लाई करने वाली दर में बदलाव का अलर्ट भेजा है।
गीडा में मेडिकल उत्पाद बनाने वाली दो यूनिटों पर प्लास्टिक दाने की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ा है। प्लास्टिक दाना आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने कोटा में 30 फीसदी की कटौती कर दी है। प्लास्टिक दाना 160 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। गीडा में मेडिकल उत्पाद बनाने वाली दोनों यूनिटों में बनने वाले डिस्पोजल सिरिंज, ग्लब्स, कैन्युला, ड्रिप सेट आदि आइटम महंगे हो गए हैं।
पैकेजिंग इंडस्ट्री
गीडा से लेकर इंडस्ट्रियल एरिया में पैकेजिंग इंडस्ट्री का बुरा हाल है। एसडी इंटरनेशनल के एमडी विनय अग्रवाल का कहना है कि पैकेजिंग इंडस्ट्री पर दोहरा मार है। प्लास्टिक दाने की कीम बढ़ने से प्रोडक्शन कास्ट बढ़ गया है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी में कमी दिख रही है। ऐसे में पैकेजिंग उत्पादों की मांग में गिरावट आई है। पैकेजिंग इंडस्ट्री के जुड़ी संगीता पांडेय का कहना है कि प्रोडक्शन कास्ट में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है।
प्रिंटिंग कारोबार
प्लास्टिक मटैरियल के कीमतों में बढ़ोतरी के चलते फ्लैक्स और होर्डिंग बनवाना महंगा हो गया है। कारोबारी प्रमोद निषाद का कहना है कि महंगाई के चलते 4 रुपये प्रति वर्ग फीट की जगह प्रिंटिंग 6 रुपये करना पड़ रहा है। महंगाई के चलते काफी जरूरी होने पर ही लोग ऑर्डर दे रहे हैं। जो ऑर्डर पहले से हैं, उन्हें पूरा करना मुश्किल हो रहा है। महंगाई से 100 से अधिक फ्लैक्स वाले प्रभावित है। पॉलीथिन की महंगाई का असर भी दिख रहा है।




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