Lok Adalats cannot give verdict on divorce, High Court explains what are the rights लोक अदालतें नहीं दे सकतीं तलाक पर फैसला, हाईकोर्ट ने समझाया क्या है अधिकार, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

लोक अदालतें नहीं दे सकतीं तलाक पर फैसला, हाईकोर्ट ने समझाया क्या है अधिकार

लखनऊ हाईकोर्ट ने विधिक सेवा प्राधिकरण उन्नाव की कार्यवाही पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब कानून स्वयं लोक अदालत को तलाक देने से रोकता है, तब ऐसे आदेश पारित करना अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है।

Mon, 1 June 2026 11:35 AMYogesh Yadav लखनऊ, विधि संवाददाता
share
लोक अदालतें नहीं दे सकतीं तलाक पर फैसला, हाईकोर्ट ने समझाया क्या है अधिकार

UP News: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि लोक अदालत अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को तलाक की डिक्री देने का कोई अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि विवाह विच्छेद की डिक्री देने का क्षेत्राधिकार सिर्फ परिवार न्यायालय के पास है और लोक अदालतें समझौता कराने तक सीमित हैं, वे न्यायिक निर्णय नहीं दे सकतीं। यह निर्णय न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने उस याचिका पर दिया जिसमें एक महिला ने वर्ष 2018 में उन्नाव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी।

पति ने उक्त समझौते को तलाक मानते हुए पुनर्विवाह का आधार बना लिया था। न्यायालय ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (लोक अदालत) विनियम, 2009 के अनुसार तलाक संबंधी मामलों को लोक अदालत में निर्णय के लिए नहीं भेजा जा सकता। लोक अदालत का कार्य केवल पक्षकारों के बीच समझौते का प्रयास करना है, न कि विवाद का न्यायिक निस्तारण करना।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी में अब कबड्डी की नेशनल खिलाड़ी की अपहरण कर हत्या, कंकालनुमा शव बरामद

खंडपीठ ने विधिक सेवा प्राधिकरण, उन्नाव की कार्यवाही पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब कानून स्वयं लोक अदालत को तलाक देने से रोकता है, तब ऐसे आदेश पारित करना अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण है। अदालत ने यह भी कहा कि समझौते में यह उल्लेख करना कि दोनों पक्ष पुनर्विवाह के लिए स्वतंत्र हैं, कानूनन अस्वीकार्य और अवैध है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:यूपी के इस एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर नहीं रुकना होगा, वाहनों की गति भी तय

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आज तक पक्षकारों के बीच किसी सक्षम न्यायालय द्वारा विधिवत तलाक की डिक्री पारित नहीं हुई है इसलिए पति द्वारा उक्त समझौते को तलाक का आधार बताना विधि सम्मत नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लोक अदालतें त्वरित और सुलभ न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं में रहकर कार्य करना होगा तथा नियमित न्यायालयों के लिए सुरक्षित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सपा में विस टिकट का फार्मूला तय, निजी एजेंसी के साथ नेताओं को यह जिम्मेदारी

मामले का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने याची महिला को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने की स्वतंत्रता प्रदान की तथा आदेश की प्रति प्रदेश की सभी लोक अदालतों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को भविष्य में अनुपालन एवं मार्गदर्शन के लिए भेजने का निर्देश दिया।

लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।