अब नक्शा पास होते ही अपने आप बदल जाएगा लैंड यूज, योगी कैबिनेट ने 37 अहम प्रस्तावों पर लगाई मुहर
भू-उपयोग परिवर्तन में आने वाली कठिनाइयों के चलते विकास प्राधिकरणों में आने वाले बहुत से आवेदनों पर काफी समय तक विचार नहीं हो पा रहा था। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में पाया गया था कि भू-उपयोग परिवर्तन के लिए प्रस्ताव भेजे जाते थे लेकिन उन पर त्वरित फैसला नहीं हो पाता।

उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण क्षेत्रों या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में अब अलग से भू-उपयोग (लैंड यूज) बदलवाने की जरूरत नहीं होगी। नक्शा पास होते ही भू-उपयोग भी बदला मान लिया जाएगा। योगी सरकार ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में निर्माण के लिए भू-उपयोग बदलने को लेकर आने वाली बाधाओं को दूर करने की कोशिश की है। सोमवार को योगी कैबिनेट की बैठक में राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दी गई। संहिता की धारा 80 में संशोधन किया गया है।
राजस्व संहिता की यह धारा कहती है कि प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में कृषि योग्य जमीन को गैर कृषि योग्य कार्य में इस्तेमाल के लिए पहले भू-उपयोग बदलवाना पड़ेगा। भू-उपयोग बदलवाए बिना आवासीय या व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए न तो जमीन का विक्रय किया जा सकता है और न उस पर कोई आवासीय या व्यवसायिक निर्माण हो सकते हैं। अब यह संशोधन किया गया है यदि विकास प्राधिकरण या क्षेत्र विशेष विकास प्राधिकरण यदि भूमि को नक्शा पास करने के लिए उपयुक्त मानते हैं और नक्शा पास कर देते हैं तो ऐसी स्थिति में भू-उपयोग बदलवाने के लिए अलग से कोई प्रक्रिया नहीं करनी पड़ेगी। यदि भूमि पर नक्शा पास कर दिया गया है तो स्वत: मान लिया जाएगा कि जिस काम के लिए नक्शा पास किया गया है, उस काम के लिए भूमि उपयुक्त है। योगी कैबिनेट से इस प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद अब राजस्व विभाग अपनी विस्तृत नियमावली बनाएगा जिसमें इससे जुड़े विस्तृत प्रावधान होंगे।
बता दें कि भू-उपयोग परिवर्तन में आने वाली कठिनाइयों के चलते विकास प्राधिकरणों में आने वाले बहुत से आवेदनों पर काफी समय तक विचार नहीं हो पा रहा था। पिछले दिनों शासन स्तर पर हुई बैठक में पाया गया था कि भू-उपयोग परिवर्तन के लिए मुख्य नगर और ग्राम नियोजक के यहां प्रस्ताव भेजे जाते थे लेकिन उन पर त्वरित फैसला नहीं हो पाता था।
अब भू-उपयोग परिवर्तन के लंबित मामलों की समीक्षा और भू-उपयोग प्रक्रिया को सरलीकृत किया गया है। योगी सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नीतियों में संशोधन किया जा रहा है।
इससे उद्योग लगाने के साथ ही रियल स्टेट सेक्टर और देश के नामचीन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जमीन मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा कैबिनेट ने सोमवार की बैठक में ऊर्जा विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई। कानपुर के घाटमपुर में 660 मेगावॉट की तीन इकाइयों वाला पावर प्लांट केंद्र और यूपी सरकार का साझा उपक्रम है। इसकी दो इकाइयां शुरू हो चुकी हैं। तीसरी जल्द शुरू होनी है।
कैबिनेट में हुए कई महत्वपूर्ण फैसले
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लखनऊ के लोकभवन में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अन्य अहम फैसले लिए गए। इसमें कुल 39 प्रस्ताव पेश किए गए जिनमें से 37 को मंजूरी दे दी गई। जबकि दो प्रस्तावों को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु किसान रहे। सरकार ने अगले रबी फसल खरीद सत्र के लिए गेहूं खरीद की नीति स्पष्ट कर दी है। इससे किसानों की आय में सीधी बढ़ोत्तरी होगी। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपए प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में 160 रुपए प्रति कुंतल ज्यादा है। किसानों को अब केवल एमएसपी ही नहीं मिलेगा बल्कि गेहूं की उतराई, सफाई और छनाई के लिए सरकार की ओर से 20 रुपए प्रति कुंतल का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाएगा।




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