किडनी कांड: कहां हैं फरार डॉक्टर, 40 ट्रांसप्लांट से जुटाया करोड़ों का कैश ठिकाने लगाने में जुटे?
डॉ. रोहित के लिए काम करने वाले एजेंट शिवम अग्रवाल ने पूछताछ में बताया है कि शहर में अब तक 40 से ज्यादा ऑपरेशन हो चुके हैं। वह डॉ. रोहित के संपर्क में वर्ष 2024 से है। उसके सामने आहूजा अस्पताल और मेडीलाइफ में ही सात ऑपरेशन हुए हैं। इन सभी ऑपरेशन में 60 से 80 लाख रुपये की वसूली की जाती थी।

यूपी के किडनी कांड के फरार डॉक्टर आखिर छिपे कहां हैं? इस बीच खबर आ रही है कि किडनी के अवैध कारोबार से जुटाई काली कमाई करोड़ों में है। फरार डाक्टर अब अपने-अपने हिस्से के इस कैश को ठिकाने लगाने में जुटे हैं। ठिकाना भी ऐसा कि किसी सूरत में भी पुलिस रुपयों तक न पहुंच पाए। सूत्रों की मानें तो डॉ. रोहित और उसकी टीम के पास 10-12 करोड़ की रकम है।
डॉ. रोहित के लिए काम करने वाले एजेंट शिवम अग्रवाल ने पुलिस को पूछताछ में बताया है कि कानपुर शहर में अब तक 40 से ज्यादा ऑपरेशन हो चुके हैं। वह डॉ. रोहित के संपर्क में वर्ष 2024 से है। उसके सामने आहूजा अस्पताल और मेडीलाइफ में ही सात ऑपरेशन हुए हैं। इन सभी ऑपरेशन में 60 से 80 लाख रुपये की वसूली की जाती थी। साउथ अफ्रीका की अरेबिका के मामले में तो डॉ. रोहित ने एक से सवा करोड़ रुपये तक वसूल किए हैं। यह रुपये डॉ. रोहित ने टीम के आठ सदस्यों में काम के हिसाब से बांटे थे। सभी 40 ऑपरेशन की बात करें तो राशि 20 करोड़ से ऊपर पहुंचती है। हालांकि पुलिस सूत्र बताते हैं कि किडनी कांड में शामिल डॉ. रोहित और उसकी टीम के पास 10-12 करोड़ रुपये कैश हैं जिन्हें यह लोग ठिकाने लगाने में जुटे हैं।
किडनी के तीन ग्रुप मिले
कानपुर के डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि साइबर टीम को टेलीग्राम पर तीन ग्रुप मिले हैं। पहला ग्रुप किडनी डोनर का है जिसमें 643 सदस्य हैं। दूसरा ग्रुप किडनी एजेंट का है, इसमें 514 लोग जुड़े हैं। तीसरा ग्रुप लिवर पार्ट डोनर का है जिसमें 700 से ज्यादा लोग जुड़े हैं। डॉ. रोहित और अन्य फरार डॉक्टर इन तीनों ग्रुपों से जुड़े हैं जबकि आयुष और पारुल किडनी डोनर ग्रुप से जुड़े मिले हैं।
परिवार और धंधा अलग-अलग सिम से चलाता था रोहित
डीसीपी ने बताया कि डॉ. रोहित बहुत शातिर है। उसके चार नंबर अब तक मिले हैं। हर नंबर डेडीकेटेड मिला है। दरअसल वह एक सिम से एजेंट शिवम अग्रवाल, नवीन पांडेय अन्य अन्य एजेंटों से बात करता था। दूसरा सिम उसने डाक्टरों से बातचीत के लिए रखा था। तीसरे सिम से वह डोनर और रिसीवर से बात करता था। एक सिम उसने परिवार और एक महिला मित्र से बातचीत करने के लिए रखा था। पुलिस की जांच में सिम का वीपीएन नंबर एनसीआर और कानपुर का मिला है। इससे साफ है कि उसने यह सिम दिल्ली, गाजियाबाद और कानपुर से लिए हैं।
मैक्स अस्पताल को नोटिस भेजेंगे
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि शिवम अग्रवाल और नवीन पांडेय के बीच बातचीत के रिकार्ड में एक ऑडियो पुलिस को मिला है। यह ऑडियो 19 नवंबर का है। ऐसे में साफ है कि जिस महिला की बात सामने आ रही है उसकी नवंबर में ऑपरेशन के बाद मौत हुई है। इसमें मैक्स अस्पताल का नाम सामने आया है। पुलिस मैक्स अस्पताल को नोटिस भेजकर हकीकत जानने का प्रयास करेगी।




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