गर्म हवाओं के थपेड़ों ने झुलसाया, पारा पहुंचा 42 डिग्री के पास
Kannauj News - जिले में गर्मी लगातार बढ़ रही है, 25 से 27 अप्रैल तक सुपर हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और बिजली कटौती की समस्या बढ़ गई है। इससे मक्का की फसल प्रभावित हो रही है, क्योंकि सिंचाई नहीं हो पा रही है। अगले कुछ दिनों में मौसम में राहत की उम्मीद है।

जिले में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 25 से 27 अप्रैल तक सुपर हीटवेव का अलर्ट जारी किया है, जबकि 24 और 25 अप्रैल को हीटवेव की चेतावनी पहले से प्रभावी है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी के संकेत दिए गए हैं।शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री रहा। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिला।
दोपहर के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग छाता, गमछा और पानी के सहारे गर्मी से बचाव करते नजर आए। स्कूलों की छुट्टी के दौरान बच्चों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार 26 और 27 अप्रैल को उमस भरी गर्मी और बढ़ेगी, जिससे हीट इंडेक्स अधिक महसूस होगा। हालांकि 28 और 29 अप्रैल को आंधी और हल्की बारिश के आसार हैं, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।बिजली व्यवस्था भी लड़खड़ाईभीषण गर्मी के साथ जिले में बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कटौती और फॉल्ट की समस्या बढ़ गई है। शुक्रवार को ब्लॉक जलालाबाद में देर रात कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहरी क्षेत्रों के कुछ फीडरों पर लोकल फॉल्ट के कारण आपूर्ति ठप रही, वहीं गांवों में भी हालात ज्यादा खबर हो गए है बिजली कटौती और अधिक तापमान से जूझ रही मक्का की फसलभीषण गर्मी और लगातार हो रही बिजली कटौती का असर अब मक्का की फसल पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खेतों में नमी की कमी और समय पर सिंचाई न हो पाने के कारण फसल कमजोर पड़ रही है। दिन में 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहे तापमान के चलते पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि इस समय मक्का की फसल को नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित रहने से ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। इससे खेत सूखने लगे हैं और पौधों में दाना बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं।
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