कानपुर के 3 अस्पतालों में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का खुलासा, IMA उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति, पति समेत 6 अरेस्ट
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 3 अस्पतालों में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का खुलासा हुआ है। छह लोगों को गिरफ्तार हुए हैं। इनमें आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ प्रीति आहूजा उनके पति डॉक्टर, एजेंट और तीन अस्पतालों के संचालक शामिल हैं।

UP News: यूपी के कानपुर में कल्याणपुर और रावतपुर के तीन अस्पतालों में रविवार को पुलिस ने अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करने का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा उनके पति डॉक्टर सुरजीत आहूजा एजेंट शिवम और तीन अस्पतालों के संचालक डॉक्टर नरेंद्र सिंह और डॉक्टर रामप्रकाश व डॉ राजेश कुमार शामिल हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया किडनी डोनर आयुष मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। उत्तराखंड से एमबीए 4th सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है। वही किडनी लेने वाली महिला नोएडा के एक बड़े स्कूल संचालक की पत्नी पारुल है। पारुल का ट्रांसप्लांट रविवार को हुआ है। आरोपियों ने पिछले माह साउथ अफ्रीका की एक महिला अरेबिका का भी किडनी ट्रांसप्लांट किया था1 है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के अनुसार काफी समय से सूचना मिल रही थी लेकिन पुष्टि न होने के चलते पुलिस खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। मार्च में ही एक अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली थी लेकिन सटीक जानकारी न होने के चलते कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। हालांकि तब पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी थी।
स्वास्थ्य विभाग ने आशंका के आधार पर आरोही हॉस्पिटल को सील कर दिया था। 23 मार्च को आरोही हॉस्पिटल का डॉक्टर राजेश ने मेड लाइफ हॉस्पिटल के संचालक से साझेदारी कर उसका साझेदार बन गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि पारुल की दोनों किडनी खराब है। उसका 8 साल से मेरठ के अस्पताल में इलाज चल रहा था। डॉक्टर अफजाल ने अपने टेलीग्राम ग्रुप में किडनी जरूरत की सूचना साझा की। इसके बाद उन्हें एक किडनी दाता आयुष मिला जो की मूल रूप से बिहार का रहने वाला युवक है।
मामले में डॉक्टर रोहित उर्फ राहुल का नाम आया है यह डॉक्टर अपनी पूरी टीम के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान फाइल तैयार नहीं की जाती थी। आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 वह बीएनएस की धारा 143 के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में नोएडा और लखनऊ के भी तीन डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। उनकी तलाश पुलिस कर रही है।




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