10 लाख में सौदा, 80 लाख में बिक्री; किडनी-लिवर सौदागरों का बंगाल तक फैला नेटवर्क
कानपुर में किडनी-लिवर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और डीसीपी वेस्ट की क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम की छापेमारी और पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सौदागरों का नेटवर्क वेस्ट यूपी से लेकर बिहार-पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है।

UP News: यूपी के कानपुर में किडनी-लिवर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और डीसीपी वेस्ट की क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम की छापेमारी और पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। गुर्दे का काला कारोबार करने वालों और सौदागरों का नेटवर्क वेस्ट यूपी से लेकर बिहार-पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। किडनी डोनर भी बिहार के समस्तीपुर का निकला है। खास बात यह है कि डोनर ने साफ तौर पर स्वीकार कर लिया कि उससे किडनी लेने के बदले रकम का सौदा हुआ था। 8 से 10 लाख में सौदा होता था और 70 से 80 लाख में बेची जाती थी।
पूछताछ में यह बात भी खुलकर सामने आ गई कि डोनर आयुष मेरठ में जहां रह रहा था उससे वहां भी संपर्क किया गया। शुरुआती पूछताछ में उसने अपने आपको एमबीए का छात्र भी बताया। हालांकि इसकी पुष्टि देर रात तक नहीं हो सकी क्योंकि वह बार-बार अपने बयान बदल रहा था। आयुष पुलिस ने बार-बार झूठ बोलता रहा। छापेमारी के बाद से ही वह घबराया हुआ था। उसने किसी को फोन लगाकर कहा-यहां से मुझे निकालो, मैं दर्द से तड़प रहरा हूं, तुम परेशान न हो..जेल तो मैं जाऊंगा मगर किसी का नाम नहीं लूंगा। पुलिस ने उसके पास से कुछ कागजात हासिल किए हैं जो उसकी पहचान का खुलासा कर रहे हैं। पूछताछ में ही यह बात भी पता चली कि जिस डोनर रिसीवर को वह बहन बता रहा था वो बहन नहीं लगती। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि किडनी गैंग में और कौन-कौन शामिल हैं और कितनी किडनियां कहां-कहां बदली जा चुकी हैं।
बड़े सर्जन के अस्पताल का कर्मचारी करता था दलाली
पुलिस ने जिस ब्रोकर शुभम को इस मामले में हिरासत में लिया है वह शहर के एक बड़े किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के अस्पताल में नौकरी करता था। वहां पर कानपुर समेत आसपास के कई जिलों के पेशेंट किडनी का इलाज कराने आते हैं। जिन्हें अपनी बातों में फंसाकर शुभम उनका किडनी ट्रांसप्लांट करने का झांसा देता था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
10 से 15 गुना मुनाफे में बेचते थे किडनी
पुलिस ने जांच में पाया कि गैंग डोनर को 8 से 10 लाख रुपए में ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करता था। फिर मरीज की आर्थिक पृष्ठभूमि देखकर 70 से 80 लाख लेकर किडनी बेची जाती थी। कई बार तो डोनर को चार से पांच लाख रुपये ही थमाकर चलता कर दिया जाता था। आयुष ने भी पहले यही बताया कि उसे चार लाख रुपये दिए थे। पुलिस को जानकारी मिली है कि लखनऊ से डॉक्टरों की टीम यहां आकर किडनी ट्रांसप्लांट किया करती थी। बाद में डोनर और रिसीवर को छोटे-छोटे अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था।




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