IIT From BHU leaving a private job to become SDM in first attempt, such was journey of PCS Alankar Agnihotri कौन हैं सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, शंकराचार्य के अपमान और UGC एक्ट के खिलाफ दिया इस्तीफा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कौन हैं सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, शंकराचार्य के अपमान और UGC एक्ट के खिलाफ दिया इस्तीफा

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्ते्श्वरानंद के बटुकों के अपमान और यूजीसी के नए रेगुलेशन के खिलाफ इस्तीफा देने वाले पीसीएस अफसर और बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का सफर संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में ही पिता का निधन हो गया। प्राइवेट नौकरी करने के बाद पीसीएस बने थे।

Tue, 27 Jan 2026 12:48 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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कौन हैं सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, शंकराचार्य के अपमान और UGC एक्ट के खिलाफ दिया इस्तीफा

यूपी के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ब्राह्मण बटुकों से हुए अपमान और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। अलंकार का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। साढ़े दस साल की उम्र में ही पिता का निधन हो गया। दिल में सिविल सेवा की तैयारी करने की चाहत होते हुए भी पहले छोटे भाई, बहनों को काबिल बनाने के लिए प्राइवेट नौकरी की। भाई बहनों के सेटल होने नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की और पहली बार में ही सफलता हासिल की।

अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनके जीवन का संघर्ष बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गया था। जब वे मात्र साढ़े दस वर्ष के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। घर के सबसे बड़े बेटे होने के नाते उन पर जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ था। लेकिन उनकी माता श्रीमती गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों में भी उनकी परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।

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आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई और प्राइवेट नौकरी

कानपुर में ही अलंकार ने 12वीं तक की पढ़ाई की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में उन्होंने पूरे प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित आईटी-बीएचयू (अब आईआईटी-बीएचयू) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए आईटी कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी ज्वाइन की।

सपनों के लिए बड़ा बलिदान

आईटी में एक अच्छी और सुरक्षित नौकरी होने के बावजूद, अलंकार के मन में सिविल सेवा में जाने का सपना हमेशा जिंदा रहा। साल 2015 में जब उनके पारिवारिक और आर्थिक दायित्व (भाई-बहनों की शादी और सेटलमेंट) पूरे हो गए, तब उन्होंने 10 साल पुरानी जमी-जमाई नौकरी छोड़ने का साहसिक फैसला लिया।

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सफलता के पीछे का ‘सपोर्ट सिस्टम’

अलंकार अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी आस्था मिश्रा और अपनी माता को देते हैं। उन्होंने बताया था कि एक विवाहित व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी करना जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने एक साल की सैलरी बचाकर फंड इकट्ठा किया ताकि अगले 2-3 साल तक परिवार को आर्थिक दिक्कत न हो।

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पहले ही प्रयास में मिली कामयाबी

अलंकार ने अपनी तैयारी के दौरान 'लो-प्रोफाइल' बने रहने और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाने की रणनीति अपनाई। उनका मानना था कि सिविल सेवा एक तपस्या है, जिसमें धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। इसी एकाग्रता का परिणाम था कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की और 'डिप्टी कलेक्टर' (एसडीएम) जैसा प्रतिष्ठित पद हासिल किया।

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